ढाका की विशेष अदालत ने तीन जमीन घोटाले मामलों में शेख हसीना को दोषी मानते हुए इक्कीस साल की कैद का आदेश दिया। अदालत का कहना है कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर परिवार को अवैध लाभ पहुंचाया गया। फैसला उस समय दिया गया जब हसीना पहले से मानवाधिकार उल्लंघन में मौत की सज़ा का सामना कर रही हैं। वे देश छोड़कर भारत में शरण ले चुकी हैं और वर्तमान में भागी हुई मानी जाती हैं।
क्या बेटे और बेटी पर भी कार्रवाई हुई?
अदालत ने माना कि मामले में सिर्फ हसीना नहीं, उनका परिवार भी शामिल था। बेटे सजीब वाजेद जॉय को पांच साल जेल और एक लाख टका जुर्माना लगाया गया। बेटी साइमा वाजेद पु्तुल को भी पांच साल कैद हुई, हालांकि जुर्माना नहीं लगा। अदालत का मत है कि दोनों ने अवैध आवंटन प्रक्रिया में भूमिका निभाई।
क्या आरोप राजनीतिक बदलेबाज़ी कहे जा रहे हैं?
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की जांच के आधार पर केस चले, जिसे हसीना परिवार राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बता रहा है। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें निशाना बनाया गया। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और सज़ा जारी रखी। बाकी तीन मामलों पर फैसला एक दिसंबर को आएगा।
क्या पहले भी हसीना को मौत की सज़ा मिली थी?
ढाका के अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने जुलाई 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शनों में सरकारी कार्रवाई को अमानवीय मानते हुए हसीना को मौत की सज़ा दी थी। उस कार्रवाई में कई लोगों की जान चली गई। कानूनी टीम के अभाव में अब उनके पास बचाव का मौका बेहद कम बचा है।
क्या भारत से अब प्रत्यर्पण की मांग की गई है?
जब से हसीना ने पांच अगस्त 2024 को भारत में शरण ली है, ढाका की अंतरिम सरकार ने आधिकारिक रूप से प्रत्यर्पण की मांग भेजी है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि आवेदन मिला है और कानूनी समीक्षा जारी है। यदि भारत सहमत हुआ तो उन्हें वापस भेजा जा सकता है।
फैसले का असर राजनीति पर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति के लिए बड़ा मोड़ हो सकता है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि आगे भी नियमित निगरानी की जाएगी। यदि प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ी तो क्षेत्रीय संबंधों पर भी असर संभव है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण मगर निर्णायक मानी जा रही है।

























