समागम की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब एक कट्टर कांग्रेस समर्थक ने मुख्यमंत्री मान के सामने रुककर कहा, “हम कांग्रेसी हैं, पर आपकी तारीफ़ करते हैं।” यह प्रतिक्रिया बताती है कि आयोजन ने राजनीतिक सीमाएं पार कर दीं। अक्सर मंचों पर आलोचना करने वाले नेताओं ने भी इंतज़ामों को बेहतरीन माना। सरकार द्वारा ‘संगत पहले’ की भावना से किया गया काम चर्चा का विषय बना। यह पहली बार हुआ जब विरोधियों ने खुले मंच पर सरकार की सराहना की।
क्या यह सच्ची जनसेवा का प्रमाण?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिना दिखावे के प्रबंधन करवा कर यह साबित किया कि जब नीयत साफ हो तो काम बोलता है। श्रद्धालुओं का कहना था कि इतने वर्षों में ऐसा प्रबंध कभी नहीं देखा। सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध थीं। रहने के लिए सुरक्षित व्यवस्था, साफ-सफाई और निरंतर सेवा उपलब्ध रही। लोगों ने कहा कि ऐसी जनसेवा ही असली राजनीति है। सरकार ने साबित किया कि सेवा भाव से किया गया कार्य हमेशा सम्मान पाता है।
क्या संगत को मिली सर्वोत्तम सुविधा?
समागम के दौरान तीन विशाल टेंट सिटी बनाई गईं जिनकी क्षमता दस हजार से अधिक लोगों की थी। रहने, ठहरने और सुरक्षा की व्यवस्था उच्च स्तर की रही। लंगर 24 घंटे चलता रहा और सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। सरकार ने ‘संगत से बढ़कर कुछ नहीं’ की भावना को जमीन पर उतारा। पंजाब में ऐसे इंतज़ाम पहली बार दर्ज हुए। लोगों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसा श्रद्धापूर्ण माहौल पहले कभी नहीं मिला।
क्या स्वास्थ्य और यात्रा प्रबंधन हुआ आदर्श?
दूर-दराज़ से आने वाली संगत के लिए मुफ्त बस सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। समागम स्थल पर मुफ्त ई-रिक्शा तक चलाए गए। 19 ‘आम आदमी क्लीनिक’ सहित 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी की गई। आंखों की जांच के लिए ‘निगाह लंगर’ लगाया गया। किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होने दी गई। यात्रियों को सहज यात्रा और त्वरित इलाज का अनुभव मिला। यह सब बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्रदान किया गया।
सुरक्षा में कितना रहा हाई-टेक प्रबंध?
लगभग आठ हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। समागम स्थल पर हाई-टेक कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी गई। त्रुटि रहित सुरक्षा योजना के लिए अधिकारियों को पहले से प्रशिक्षित किया गया। ड्रोन शो और QR कोड आधारित प्रदर्शनी से युवाओं को सिख इतिहास से जोड़ने की पहल की गई। प्रशासन ने कहा कि श्रद्धालु सुरक्षित महसूस करें, यही लक्ष्य था। सुरक्षा और तकनीक का संगम इस आयोजन की खासियत बना।
क्या बना यह अनुभव यादगार सेवा का?
कला, संगीत और फिल्म जगत की हस्तियों ने भी इन इंतज़ामों की सराहना की। श्रद्धा और सेवा के इस संगम ने हर आगंतुक के मन में अमिट यादें छोड़ीं। मुख्यमंत्री मान ने दिखा दिया कि गुरु साहिब की कृपा से जब सरकार सेवा भाव से काम करती है, तो नतीजे हमेशा उच्च स्तर के होते हैं। यह आयोजन सिर्फ प्रबंधन नहीं बल्कि आध्यात्मिक समर्पण का उदाहरण बना। लोगों ने कहा कि यह अनुभव भूल पाना संभव नहीं।

























