पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सोमवार से दस दिन के जापान दौरे पर रवाना हुए। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य जापानी उद्योगपतियों से मुलाकात करके उन्हें पंजाब में निवेश करने के लिए प्रेरित करना है। सरकार मानती है कि अगर जापानी कंपनियां पंजाब में आएंगी तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मान वहां एक विशेष उद्योग शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे जिसे पंजाब सरकार ने खास तौर पर आयोजित किया है। वह बैठक में सीधे अपने शब्दों में बताएंगे कि पंजाब उद्योग के लिए सुरक्षित और लाभदायक जगह है। यह दौरा पंजाब के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार इसे नए औद्योगिक युग की शुरुआत बताने लगी है।
किन क्षेत्रों पर फोकस रहेगा
पंजाब सरकार का फोकस विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर है जहां जापान की तकनीक मजबूत मानी जाती है। इनमें उन्नत मशीनरी निर्माण, वाहन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा जैसे सेक्टर शामिल हैं। सरकार चाहती है कि पंजाब सिर्फ कृषि पर निर्भर न रहे बल्कि आधुनिक उद्योगों का केंद्र भी बनकर उभरे। इन सेक्टरों में जापान की विशेषज्ञता दुनिया भर में मानी जाती है और पंजाब इससे फायदा उठाना चाहता है। अगर यह निवेश आता है तो राज्य में तकनीकी ट्रेनिंग भी शुरू हो सकती है। इससे युवाओं को विदेश जाने की जरूरत कम होगी और यहां नए अवसर पैदा होंगे। सरकार इस मॉडल को औद्योगिक विकास की नई दिशा मानती है।
पहले भी हुई थी बातचीत
हाल ही में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के साथ एक बड़ी वीडियो बैठक की थी। इस बैठक में जापानी दूतावास, जेट्रो, जेसीसीआई और भारत में काम कर रही 25 से ज्यादा जापानी कंपनियां मौजूद थीं। इनमें पैनासोनिक, सुमितोमो, एनईसी, निप्पॉन और टोयोटा जैसी प्रसिद्ध कंपनियां शामिल थीं। बैठक में पंजाब के औद्योगिक माहौल, भूमि उपलब्धता, बिजली लागत और श्रम स्थिति पर बात हुई थी। कंपनी प्रतिनिधियों ने पंजाब में दिलचस्पी दिखाई लेकिन कुछ ने स्थिर नीति और सुरक्षा का आश्वासन भी मांगा। इसी को आगे बढ़ाने के लिए अब मुख्यमंत्री खुद जापान पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि सीधी मुलाकात भरोसा बनाती है।
मार्च 2026 निवेश सम्मेलन
पंजाब सरकार 13 से 15 मार्च 2026 तक आईएसबी मोहाली में छठा प्रगतिशील पंजाब निवेशक शिखर सम्मेलन आयोजित करेगी। जापान दौरा इसी बड़े कार्यक्रम की तैयारी का हिस्सा है। निवेश पंजाब विभाग ने बताया कि वह विभिन्न विभागों को जोड़कर एक ही खिड़की पर सारी मंजूरी देने की योजना बना रहा है। इसे यूनिफाइड रेगुलेटरी मॉडल कहा गया है। इससे निवेशकों को समय और पैसा दोनों की बचत होगी। सरकार चाहती है कि उद्योग लगाने की प्रक्रिया आसान और तेज हो। इस मॉडल को देश में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है। उम्मीद है इस सम्मेलन से बड़े अनुबंध हो सकते हैं।
जर्मनी दौरा भी सफल रहा
इससे पहले 2022 में मुख्यमंत्री मान जर्मनी गए थे जहां उन्होंने कई उद्योगपतियों से समझौते किए। उन्होंने दिल्ली में भी अलग-अलग देशों के राजदूतों और उद्योगपतियों से मुलाकात की थी। हालांकि दिसंबर 2024 में जर्मनी जाने की उनकी योजना केंद्र सरकार ने मंजूर नहीं की। उसके बावजूद उन्होंने डिजाइन, ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र में निजी बातचीत जारी रखी। जर्मनी में उनके भाषण की काफी सराहना हुई थी। अब उम्मीद की जा रही है कि जापान दौरा भी इसी तरह सफल रहेगा। उनके साथ विशेषज्ञों की टीम भी गई है।
पंजाब के लिए क्या बदलेगा
अगर जापान से निवेश आता है तो राज्य में औद्योगिक पार्कों की संख्या बढ़ सकती है। सरकार पहले से ही कई जगह जमीन चिह्नित कर चुकी है। इससे नौजवानों को रोजगार मिलेगा और किसान भी अपनी जमीन उद्योग को किराए पर दे सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि पंजाब केवल कृषि राज्य न रहकर मैन्युफैक्चरिंग राज्य भी बनेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जापानी अनुशासन और पंजाबी मेहनत मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। अगर यह योजना सफल हुई तो आने वाले सालों में पंजाब उद्योग के मानचित्र पर बड़ी जगह बना सकता है। यह दौरा उसी दिशा की शुरुआत माना जा रहा है।
लोगों की उम्मीदें और सरकार की तैयारी
लोगों को उम्मीद है कि यह दौरा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे बल्कि जमीनी स्तर पर भी असर दिखाए। सरकार ने निवेशकों के स्वागत के लिए विशेष तंत्र बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पंजाब की छवि बदलने के लिए निकले हैं। वहां से लौटते ही वे उद्योग नीति में ज़रूरी बदलाव कर सकते हैं। व्यापारिक वर्ग भी इस दौरे पर नजर रखे हुए है। राज्य के छात्रों और युवाओं में भी उत्सुकता है। अगर समझौते हुए तो कई नए रोजगार विकल्प खुल सकते हैं। पंजाब इसे विकास के एक नए अध्याय के रूप में देख रहा है।























