भारत और ओमान के बीच होने वाला यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस करार पर मस्कट में हस्ताक्षर होंगे। समझौते की मौजूदगी में Narendra Modi रहेंगे। यह यात्रा उनकी तीन देशों की चार दिवसीय विदेश यात्रा का अंतिम चरण है। इस समझौते से व्यापार को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों देश लंबे समय से आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे थे। अब इसे औपचारिक रूप दिया जा रहा है।
सीईपीए समझौता असल में है क्या?
इस मुक्त व्यापार समझौते को व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता कहा जाता है। इसे सीईपीए के नाम से जाना जाता है। इसके तहत दोनों देश अधिकतर वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी कम या खत्म करेंगे। इससे कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और रत्न आभूषण जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। व्यापार की प्रक्रियाएं आसान होंगी। निवेश को बढ़ावा मिलेगा। सीईपीए पर बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी। अब इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
पीयूष गोयल ने समझौते पर क्या कहा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal पहले ही मस्कट पहुंच चुके हैं। उन्होंने ओमान भारत व्यापार मंच को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए बड़े आर्थिक अवसर लाएगा। उन्होंने बताया कि ओमान के लिए यह करीब दो दशकों में पहला व्यापार समझौता है। इससे पहले ओमान ने 2006 में अमेरिका के साथ एफटीए किया था। गोयल ने इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद करार दिया।
खाड़ी क्षेत्र में ओमान भारत के लिए कितना अहम?
ओमान खाड़ी सहयोग परिषद देशों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों का व्यापार करीब 10.5 अरब डॉलर रहा। भारत का निर्यात लगभग 4 अरब डॉलर का था। वहीं आयात 6.54 अरब डॉलर रहा। भारत ओमान से मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद और यूरिया आयात करता है। इनकी हिस्सेदारी कुल आयात में 70 प्रतिशत से ज्यादा है। यह आंकड़े ओमान की अहमियत दिखाते हैं।
भारतीय निवेश में तेजी से बढ़ोतरी क्यों हुई?
पीयूष गोयल के मुताबिक ओमान में भारतीय निवेश तेजी से बढ़ा है। 2020 के बाद से यह निवेश तीन गुना बढ़ गया है। अब यह करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। मुक्त व्यापार समझौते से निवेश को और बढ़ावा मिलेगा। भारतीय कंपनियों को नए बाजार मिलेंगे। ओमान में रोजगार और उद्योग को भी फायदा होगा। इसे दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा माना जा रहा है।
इथियोपिया में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या संदेश दिया?
ओमान पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया की संसद को संबोधित किया। उन्होंने भारत और इथियोपिया को स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश विकासशील राष्ट्र हैं। दोनों एक दूसरे से सीख सकते हैं। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की बात की। उनके भाषण पर संसद में तालियां बजीं।
विदाई के दृश्य ने क्या संकेत दिया?
इथियोपिया से रवाना होते समय वहां के प्रधानमंत्री Abiy Ahmed Ali खुद प्रधानमंत्री मोदी को छोड़ने पहुंचे। उन्होंने खुद कार चलाकर उन्हें विमान तक पहुंचाया। दोनों नेताओं ने गले मिलकर विदाई ली। इसे दोनों देशों के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना गया। इस दौरे के बाद भारत ओमान संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। यह यात्रा कूटनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

























