हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में समय से आगे निकल जाती हैं। ‘नदिया के पार’ ऐसी ही एक फिल्म है। यह सिर्फ हिट नहीं थी बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ी। गांव की सादगी ने दर्शकों को छुआ। भाषा बेहद सरल थी। किरदार अपने जैसे लगे। इसी वजह से फिल्म कल्ट बन गई। आज भी इसका नाम लिया जाता है। अब यह फिल्म फिर से बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी। बिहार में इसके लिए खास कार्यक्रम रखा गया है। उद्देश्य नई पीढ़ी को सिनेमा की जड़ों से जोड़ना है। डिजिटल दौर में क्लासिक फिल्मों की अहमियत बताना लक्ष्य है। आयोजकों का मानना है कि युवा इससे सीखेंगे। सिनेमा का सांस्कृतिक पक्ष सामने आएगा। यही सोच इस स्क्रीनिंग के पीछे है।
पटना में कहां होगी स्पेशल स्क्रीनिंग?
यह स्पेशल स्क्रीनिंग पटना में होगी। आयोजन बिहार स्टेट फिल्म डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉर्पोरेशन कर रहा है। फिल्म गांधी मैदान के पास दिखाई जाएगी। रीजेंट सिनेमा कैंपस को चुना गया है। इसे हाउस ऑफ वैरायटी में दिखाया जाएगा। अभी तारीख घोषित नहीं हुई है। जल्द आधिकारिक जानकारी आने की उम्मीद है।
कौन-कौन कलाकार थे फिल्म में?
फिल्म में मुख्य भूमिका में सचिन पिलगांवकर नजर आए थे। उनके साथ साधना सिंह थीं। दोनों की जोड़ी को खूब पसंद किया गया। अभिनय सादा लेकिन प्रभावशाली था। सपोर्टिंग किरदार भी मजबूत थे। सभी कलाकार कहानी में घुले मिले लगे। यही फिल्म की ताकत बनी।
कितने बजट में बनी और कितनी कमाई की?
इस फिल्म का बजट बेहद कम था। इसे सिर्फ 18 लाख रुपये में बनाया गया था। रिलीज के बाद फिल्म ने धमाल मचा दिया। कुल कमाई करीब 5.4 करोड़ रुपये रही। उस दौर में यह बड़ी रकम थी। मुनाफे के लिहाज से यह ऐतिहासिक हिट बनी। आज भी इसका रिकॉर्ड चर्चा में रहता है।
गानों ने फिल्म को कैसे अमर बनाया?
‘नदिया के पार’ के गाने आज भी लोगों को याद हैं। ‘सांची कहे तोरे आवन से’ बेहद लोकप्रिय हुआ। ‘कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया’ आज भी गुनगुनाया जाता है। संगीत कहानी का हिस्सा लगा। गाने भावनाओं को मजबूत करते थे। शब्द सीधे दिल तक पहुंचते थे। यही वजह है कि 43 साल बाद भी गीत जिंदा हैं।
राजश्री प्रोडक्शंस की क्या भूमिका रही?
इस फिल्म का निर्माण राजश्री प्रोडक्शंस ने किया था। राजश्री की पहचान पारिवारिक फिल्मों से रही है। ‘नदिया के पार’ ने इस पहचान को मजबूत किया। देसी कहानी को मंच मिला। भारतीय संस्कृति को सम्मान मिला। यह फिल्म उनके बैनर की पहचान बन गई। आज भी इसे उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।























