SIR के तहत मतदाता सूची की विशेष जांच की गई। इसका मुख्य उद्देश्य गलत, डुप्लीकेट और अपात्र नामों को हटाना था। चुनाव आयोग ने नई ड्राफ्ट लिस्ट जारी की है। यह लिस्ट आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की गई। पहले यह सूची 31 दिसंबर को आनी थी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब इसे जारी किया गया। इस प्रक्रिया से मतदाता डेटा को अपडेट किया गया है। इसे चुनावी सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
कितने मतदाताओं के नाम काटे गए?
इस रिवीजन के बाद 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पहले कुल मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ से अधिक थी। अब मतदाता सूची में 12.55 करोड़ नाम शेष हैं। यह आंकड़ा काफी बड़ा माना जा रहा है। राज्य की राजनीति में इस पर चर्चा तेज है। कई राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हैं। पूरी चुनावी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी जा रही है।
नाम काटने के क्या कारण बताए गए?
चुनाव अधिकारियों के अनुसार इसके कई कारण सामने आए हैं। लगभग 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए। 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित हो चुके थे। 25.47 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मिले। कुछ मामलों में आवश्यक फॉर्म वापस नहीं आए। इसी वजह से ऐसे नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो सके। पूरी जांच दस्तावेज़ी आधार पर की गई है।
दावे और आपत्तियां कब तक दर्ज होंगी?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी Navdeep Rinwa ने जानकारी दी है। दावे और आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक दर्ज की जा सकती हैं। लोग नए नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। गलतियों के सुधार का भी अवसर मिलेगा। आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा दी गई है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से होगी। नागरिकों को एक महीने का समय दिया गया है।
आपत्तियों का निपटारा कैसे होगा?
सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 27 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। नोटिस अवधि में मिली सभी अर्जियों की जांच होगी। हर मामले को अलग-अलग देखा जाएगा। सभी फॉर्म्स का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। अधिकारियों के पास पूरा डेटा उपलब्ध है। प्रक्रिया को पारदर्शी बताया जा रहा है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
सियासत में क्यों मची हलचल?
ड्राफ्ट सूची जारी होते ही राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। सरकार और चुनाव आयोग अपना पक्ष रख रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने का मामला पहले कभी सामने नहीं आया। यह मुद्दा मतदाता विश्वास से जुड़ गया है। आने वाले चुनावों पर इसका असर पड़ सकता है। सभी की निगाहें अब अंतिम सूची पर टिकी हैं।
आगे की प्रक्रिया क्या रहेगी?
दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं वे आवेदन कर सकते हैं। Election Commission of India ने नागरिकों से अपील की है। सभी लोग अपना नाम सूची में जरूर जांचें। समय रहते कार्रवाई करना जरूरी बताया गया है। मताधिकार की सुरक्षा इसका मुख्य उद्देश्य है। इससे चुनाव प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।

























