सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले के केस को ट्रांसफर करने की मांग पर सख्त रुख दिखाया है।अदालत ने कहा कि यह फैसला आसान नहीं है।मामला उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों जगह दर्ज है।एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रायल भेजना कई दिक्कतें पैदा कर सकता है।कोर्ट हर पहलू को ध्यान से देखना चाहती है।किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।इसी वजह से अदालत ने सावधानी से आगे बढ़ने की बात कही।
क्या सह अभियुक्तों को परेशानी हो सकती है?
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि केस ट्रांसफर करने से दूसरे आरोपियों को दिक्कत हो सकती है।उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में भी कई सह अभियुक्त हैं।अगर ट्रायल छत्तीसगढ़ गया तो उन्हें बार बार सफर करना पड़ेगा।इससे उनकी कानूनी लड़ाई मुश्किल हो सकती है।कोर्ट किसी को राहत देकर दूसरे को नुकसान नहीं देना चाहती।इसी संतुलन की बात बेंच ने कही।अदालत हर पक्ष की सुविधा देख रही है।
क्या दोनों राज्यों के आरोप एक जैसे हैं?
निरंजन दास की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि दोनों राज्यों में लगाए गए आरोप एक ही साजिश से जुड़े हैं।उनका कहना है कि इसलिए केस एक ही जगह सुना जाना चाहिए।लेकिन कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले समन्वय बेंच ने कहा था कि दोनों एफआईआर अलग अलग राज्यों से जुड़ी हैं।हर राज्य का अपना अधिकार क्षेत्र होता है।इस वजह से ट्रांसफर अपने आप नहीं हो सकता।कोर्ट ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया।
क्या नोएडा वाले आरोपी पर भी सवाल उठा?
सीजेआई ने पूछा कि अगर कोई आरोपी नोएडा का है तो उसके साथ क्या होगा।उन्होंने कहा कि वह यह दलील दे सकता है कि उसे रायपुर क्यों बुलाया जाए।इससे अलग अलग तरह की मांगें खड़ी हो सकती हैं।मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह आरोपी छत्तीसगढ़ में भी मुकदमे का सामना कर रहा है।इसलिए उसे वहीं ट्रायल झेलना पड़ेगा।फिर भी कोर्ट ने सावधानी बरतने की बात दोहराई।किसी को अनुचित नुकसान नहीं होना चाहिए।
क्या अदालत सीमित राहत दे सकती है?
सीजेआई ने संकेत दिया कि कोर्ट कुछ सीमित राहत देने पर विचार कर सकती है।जैसे हाजिरी से छूट दी जा सकती है।लेकिन पूरा ट्रायल ट्रांसफर करने से अदालत फिलहाल हिचक रही है।कोर्ट नहीं चाहती कि एक आदेश से बाकी आरोपियों को परेशानी हो।इसी वजह से हर कदम सोच समझकर उठाया जा रहा है।रोहतगी ने सभी आरोपियों को सुनने की मांग की।अदालत ने इसे स्वीकार किया।
क्या सभी केस एक साथ सुने जाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि तीनों जुड़े मामलों को एक साथ जोड़ दिया जाए।इन सभी पर एक साथ सुनवाई होगी।अदालत ने इसके लिए 19 जनवरी की तारीख तय की है।उस दिन सभी पक्ष अपनी बात रखेंगे।इससे पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।कोर्ट सभी आरोपियों की दलीलें सुनना चाहती है।इसके बाद कोई फैसला लिया जा सकता है।यह केस काफी अहम माना जा रहा है।
क्या घोटाला कांग्रेस सरकार के समय हुआ था?
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ था।उस समय छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी।आरोप है कि शराब नीति में गड़बड़ी की गई।इससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ।एक शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया।जांच अभी जारी है।सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।























