पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नजमुल इस्लाम ने खिलाड़ियों को लेकर कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर टीम भारत नहीं जाती तो खिलाड़ियों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड ने खिलाड़ियों पर बहुत पैसा खर्च किया है लेकिन टीम ने कोई बड़ी जीत नहीं दिलाई. यह बात खिलाड़ियों को सीधी धमकी जैसी लगी. इससे गुस्सा फैल गया.
क्या तमीम इकबाल को एजेंट कहने से बात बिगड़ी
इससे पहले नजमुल ने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को भारत का एजेंट कह दिया था. तमीम ने सिर्फ यह कहा था कि भारत के साथ विवाद शांत तरीके से सुलझना चाहिए. इस बयान ने पूरे क्रिकेट जगत को नाराज कर दिया. खिलाड़ियों को लगा कि उनके सम्मान पर हमला हो रहा है.
क्या खिलाड़ियों ने मैच खेलने से इनकार कर दिया
क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने ऐलान किया कि जब तक नजमुल इस्तीफा नहीं देंगे तब तक कोई खिलाड़ी बीपीएल या दूसरी लीग नहीं खेलेगा. इसका असर तुरंत दिखा. ढाका में एक बीपीएल मैच का टॉस तक नहीं हो पाया. टीमें मैदान पर ही नहीं उतरीं. इससे बोर्ड पर दबाव बढ़ गया. हालात बिगड़ते देख बोर्ड ने प्रेस बयान जारी किया. बोर्ड ने कहा कि नजमुल के बयान बोर्ड की आधिकारिक राय नहीं हैं. बोर्ड ने खेद जताया और कहा कि खिलाड़ियों का सम्मान किया जाता है. इसके साथ ही बोर्ड ने नजमुल को कारण बताओ नोटिस जारी किया. उनसे 48 घंटे में जवाब मांगा गया है.
क्या बोर्ड खिलाड़ियों को मनाने की कोशिश कर रहा है
BCB ने खिलाड़ियों से अपील की है कि वे पेशेवर रवैया रखें और बीपीएल को पूरा होने दें. बोर्ड ने कहा कि खिलाड़ी ही क्रिकेट की असली ताकत हैं. बीपीएल देश की सबसे बड़ी लीग है और इसे नुकसान नहीं होना चाहिए.
क्या भारत वाला विवाद इस झगड़े की जड़ है
बांग्लादेश और भारत के बीच T20 विश्व कप को लेकर तनाव चल रहा है. बांग्लादेश चाहता है कि उसके मैच श्रीलंका में हों. ICC ने अभी सहमति नहीं दी है. इसके अलावा मुस्तफिजुर रहमान को IPL से हटाए जाने से खिलाड़ी नाराज हैं. इसी माहौल में नजमुल का बयान आग में घी बन गया. अगर यह टकराव लंबा चला तो पूरी लीग रुक सकती है. खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच भरोसा टूट रहा है. अब सबकी नजर नजमुल के जवाब और बोर्ड के अगले कदम पर है. यह तय करेगा कि संकट थमेगा या और बढ़ेगा.
























