ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान में बहाया गया खून किसी आंतरिक कारण से नहीं बल्कि विदेशी साजिश का नतीजा है। खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि जनता की हत्या के पीछे वाशिंगटन की नीतियां हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान पहले से ही तनाव में है। सत्ता के शीर्ष से आए इन शब्दों ने माहौल और गरमा दिया है।
साजिशकर्ताओं को क्या चेतावनी दी
खामेनेई ने साफ कहा कि ईरान किसी भी साजिशकर्ता को माफ नहीं करेगा। चाहे वह देश के अंदर हो या बाहर। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी राष्ट्र की संप्रभुता से खेलने वालों की कमर तोड़ दी जाएगी। खामेनेई के मुताबिक यह आंदोलन सामान्य विरोध नहीं था। इसमें बाहरी ताकतों की सीधी भूमिका थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हिंसा को बढ़ावा दिया। देश को जान-माल का भारी नुकसान हुआ। ऐसे लोगों को सजा मिलना तय है।
बयान में खामेनेई ने क्या कहा
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर भी अपना संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। लेकिन देश को कमजोर करने वालों को छोड़ा भी नहीं जाएगा। उन्होंने मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों का हवाला दिया। दावा किया कि प्रदर्शनों में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। खामेनेई ने इस हिंसा के पीछे अमेरिका और इजराइल से जुड़े तत्वों को बताया। उन्होंने कहा कि इन ताकतों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई होगी।
विरोध प्रदर्शन कैसे शुरू हुए
ईरान में विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे। शुरुआत आर्थिक संकट से हुई। महंगाई बढ़ी। मुद्रा कमजोर हुई। डॉलर के मुकाबले रियाल गिरता गया। इससे व्यापारियों और दुकानदारों में नाराजगी फैली। हड़तालें शुरू हुईं। धीरे-धीरे यह आंदोलन सरकार विरोधी बन गया। सड़कों पर भीड़ बढ़ती गई। हालात सरकार के नियंत्रण से बाहर होने लगे।
सरकार ने हालात संभालने को क्या किया
स्थिति को काबू में करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए। करीब आठ दिनों तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई। सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। अब इंटरनेट सेवाओं में कुछ राहत मिली है। लेकिन सड़कों पर तनाव बना हुआ है। लगातार गिरफ्तारियों से डर का माहौल है। आम लोग अभी भी असमंजस में हैं।
अमेरिका पर आरोप क्यों अहम हैं
खामेनेई का बयान सिर्फ आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। यह सीधे अमेरिका के साथ टकराव का संकेत देता है। ईरान का आरोप है कि बाहरी ताकतें देश को अस्थिर करना चाहती हैं। इस बयान से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका पहले ही ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए है। अब आरोपों ने रिश्तों को और तल्ख कर दिया है।
ईरान के लिए आगे क्या मायने
ईरान इस वक्त राजनीतिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर दबाव में है। खामेनेई की चेतावनी बताती है कि सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है। विदेशी साजिश का मुद्दा अब केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में कार्रवाई तेज हो सकती है। देश के भीतर असहमति पर सख्ती बढ़ने के संकेत हैं। दुनिया की नजरें अब तेहरान पर टिकी हैं। यह संकट किस दिशा में जाएगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।
























