19 जनवरी 2026 को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान सिर्फ दो घंटे के लिए भारत आए। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एयरपोर्ट पहुंचकर उन्हें रिसीव करने गए। आम तौर पर ऐसा कम देखने को मिलता है। यह सिर्फ औपचारिक स्वागत नहीं था। यह भरोसे और निजी रिश्ते का संकेत था। दोनों नेताओं के चेहरे पर सहजता दिखी। हाथ मिलाना और साथ कार में बैठना प्रतीकात्मक था। संदेश साफ था कि रिश्ता गहरा है।
क्या PM मोदी का एयरपोर्ट पहुंचना खास था?
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति को भाई कहकर संबोधित किया। प्रोटोकॉल से ऊपर जाकर किया गया यह स्वागत अपने आप में खास था। इससे दुनिया को संकेत गया कि भारत UAE को कितना महत्व देता है। यह कूटनीति से आगे की बात थी। यह आपसी विश्वास का प्रदर्शन था। सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई। तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं रहीं। वे रिश्तों की मजबूती का सबूत बनीं।
क्या UAE भारत का भरोसेमंद साझेदार है?
UAE भारत का बड़ा व्यापारिक और ऊर्जा साझेदार है। तेल और गैस की आपूर्ति में उसकी भूमिका अहम है। निवेश और रक्षा सहयोग भी लगातार बढ़ा है। लाखों भारतीय UAE में काम करते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं हैं। यह लोगों से लोगों का रिश्ता भी है। इसी वजह से छोटी यात्रा भी बड़ी मानी गई।
क्या यह दौरा इतिहास में दर्ज होगा?
राष्ट्रपति बनने के बाद यह शेख मोहम्मद की तीसरी भारत यात्रा है। पिछले दस सालों में यह उनका पांचवां दौरा रहा। यह आंकड़ा अपने आप में बहुत कुछ कहता है। यह भरोसे की निरंतरता दिखाता है। समय भले कम रहा, लेकिन संदेश गहरा था। कूटनीति में नीयत समय से बड़ी होती है।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
इस मुलाकात में व्यापार, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। क्षेत्रीय स्थिरता पर भी बातचीत हुई। IMEEC जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा अहम रही। यह कॉरिडोर भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ता है। भविष्य की साझेदारी के नए रास्ते यहीं से निकलते दिखे।
क्या यह रिश्तों को नई दिशा देगा?
यह यात्रा दिखाती है कि भारत और UAE मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। आर्थिक विकास के साथ शांति और सुरक्षा भी साझा लक्ष्य हैं। दो घंटे की यह मुलाकात लंबे असर छोड़ गई। दोस्ती सिर्फ शब्दों में नहीं, व्यवहार में दिखी।

























