यह व्यापार समझौता कभी लगभग तय माना जा रहा था।दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।उम्मीद जताई जा रही थी कि जल्द समझौता हो जाएगा।लेकिन महीनों से मामला आगे नहीं बढ़ सका।अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।व्यापार जगत में असमंजस की स्थिति बनी रही।इसी बीच लीक ऑडियो ने हलचल बढ़ा दी।
किस ऑडियो के लीक होने का दावा किया गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ की ऑडियो लीक हुई है।टेड क्रूज़ को ट्रंप का करीबी माना जाता है।यह बातचीत पार्टी के कुछ डोनर्स के साथ फोन पर हुई थी।कॉल के दौरान ट्रेड डील पर खुलकर चर्चा की गई।कई अहम नाम भी बातचीत में लिए गए।ऑडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह दावा किस रिपोर्ट में सामने आया?
यह खुलासा अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में किया गया है।रिपोर्ट में लीक ऑडियो का हवाला दिया गया है।कहा गया कि यह एक निजी फोन कॉल की रिकॉर्डिंग है।डोनर्स ने भारत-अमेरिका डील को लेकर सवाल पूछे थे।सीनेटर क्रूज़ ने सीधे जवाब दिए।बातचीत का लहजा काफी स्पष्ट बताया गया है।इससे दोनों देशों के रिश्तों पर नई चर्चा शुरू हो गई।
नवारो और जेडी वेंस पर क्या आरोप लगाए गए?
लीक ऑडियो के अनुसार क्रूज़ ने दो बड़े नाम लिए।व्हाइट हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस।क्रूज़ ने कहा कि ये दोनों डील के विरोध में हैं।उनके मुताबिक यही लोग समझौते में बड़ी रुकावट हैं।उन्होंने ट्रंप की नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया।इसी कारण डील आगे नहीं बढ़ सकी।
टेड क्रूज़ ने अपनी भूमिका को लेकर क्या कहा?
क्रूज़ ने दावा किया कि वह ट्रेड डील के पक्ष में हैं।उन्होंने कहा कि वह व्हाइट हाउस से लगातार लड़ रहे हैं।उनका मकसद भारत के साथ समझौता तय कराना है।जब उनसे पूछा गया कि कौन रोक रहा है।तो उन्होंने तीन नाम गिनाए।नवारो, जेडी वेंस और डोनाल्ड ट्रंप।यह बयान काफी सनसनीखेज माना जा रहा है।
टैरिफ को लेकर ट्रंप को पहले क्या चेतावनी दी गई थी?
रिपोर्ट के अनुसार क्रूज़ ने ट्रंप को पहले आगाह किया था।लिबरेशन डे टैरिफ लागू न करने की सलाह दी गई थी।उन्होंने कहा था कि इससे कीमतें बढ़ेंगी।आम अमेरिकियों पर इसका बोझ पड़ेगा।रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है।2026 के मध्यावधि चुनावों का भी जिक्र किया गया।लेकिन ट्रंप ने यह सलाह नहीं मानी।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता इस समय कहां खड़ी है?
ट्रेड डील कई महीनों से ठंडे बस्ते में है।अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगा रहा है।करीब पांच महीनों से 50 प्रतिशत टैरिफ वसूला जा रहा है।इससे पहले फरवरी में बातचीत शुरू हुई थी।मार्च और अप्रैल में औपचारिक वार्ताएं भी हुईं।लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई।बयानों और हकीकत में साफ अंतर दिख रहा है।























