मोहाली की अदालत में दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट करीब ग्यारह हजार पन्नों की है।इतनी बड़ी चार्जशीट आम मामलों में कम ही देखी जाती है।इससे साफ होता है कि जांच एजेंसी ने गहराई से पड़ताल की है।दस्तावेजों की संख्या केस की गंभीरता दिखाती है।हर पन्ना अलग लेनदेन की कहानी कहता है।अदालत में इसे बड़े सबूत के तौर पर देखा जा रहा है।इससे केस की रफ्तार तेज हो सकती है।
मजीठिया की मुश्किलें कैसे बढ़ीं?
इस नई चार्जशीट से Bikram Singh Majithia की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।मामला अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा।जांच वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच चुकी है।कई कंपनियों और लेनदेन का जिक्र सामने आया है।विजिलेंस एजेंसी दबाव में नहीं दिख रही।कानूनी लड़ाई लंबी होने के संकेत हैं।राजनीतिक हलकों में भी हलचल है।
हरप्रीत गुलाटी की भूमिका क्या बताई जा रही है?
विजिलेंस ने मजीठिया के करीबी सहयोगी Harpreet Gulati के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की है।गुलाटी को कथित कारोबारी साझेदार बताया जा रहा है।चार्जशीट में उसके वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं।कंपनियों में हिस्सेदारी की जानकारी दी गई है।बैंक खातों की जांच का जिक्र है।जांच एजेंसी ने लिंक जोड़ने की कोशिश की है।यही वजह है कि केस नया मोड़ ले रहा है।
किन वर्षों के लेनदेन की जांच हुई है?
चार्जशीट के मुताबिक जांच साल 2007 से 2017 तक की गई है।इस पूरे दौर को अहम माना गया है।इसी अवधि में संपत्ति बढ़ने का आरोप है।कई कंपनियों का जिक्र सामने आया है।नकदी और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल हुई है।रिकॉर्ड को आपस में जोड़ा गया है।जांच एजेंसी इसे मजबूत कड़ी बता रही है।
कितनी रकम पर शक जताया गया है?
विजिलेंस ब्यूरो का दावा है कि करीब दस करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन संदिग्ध है।यह रकम अलग अलग स्रोतों से जुड़ी बताई गई है।कथित तौर पर इसे आय से अधिक बताया गया है।जांच में कंपनियों की भूमिका भी जोड़ी गई है।पैसे के रास्तों पर सवाल उठाए गए हैं।चार्जशीट में इनका ब्योरा दर्ज है।अदालत अब इन तथ्यों को परखेगी।
मजीठिया इस समय कहां हैं?
गौरतलब है कि 25 जून 2025 को मजीठिया को गिरफ्तार किया गया था।तब से वह नाभा जेल में बंद हैं।निचली अदालत से उन्हें जमानत नहीं मिली।पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली।फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है।जमानत याचिका विचाराधीन बताई जा रही है।कानूनी प्रक्रिया जारी है।
केस आगे किस दिशा में जा सकता है?
हरप्रीत गुलाटी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट से केस और मजबूत हुआ है।गुलाटी इस समय न्यायिक हिरासत में है।उसकी कंपनियों की जांच जारी है।बैंक खातों की परतें खुल सकती हैं।जांच एजेंसी और सबूत पेश कर सकती है।राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा।आने वाले दिनों में केस और बड़ा हो सकता है।

























