राशिद लतीफ ने माना है कि टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार का सही वक्त निकल चुका है।उन्होंने कहा कि अब पूरा टूर्नामेंट छोड़ना व्यावहारिक नहीं है।पहले वह इस मुद्दे पर सख्त थे।अब उनके रुख में नरमी आई है।लतीफ ने कहा कि हर फैसले का एक समय होता है।जो मौका निकल जाए वह वापस नहीं आता।इसलिए अब नया रास्ता तलाशना जरूरी है।
लतीफ ने क्या विकल्प सुझाया है?
लतीफ ने कहा कि पाकिस्तान टूर्नामेंट में हिस्सा ले।लेकिन भारत के खिलाफ मैच न खेले।उनका मानना है कि यह विरोध का अलग तरीका हो सकता है।इससे विरोध भी दर्ज होगा।और टूर्नामेंट से बाहर भी नहीं होना पड़ेगा।लतीफ ने साफ किया कि यह फैसला पीसीबी नहीं ले सकता।इसके लिए सरकार को आगे आना होगा।
फैसला सरकार करेगी या बोर्ड?
राशिद लतीफ ने कहा कि भारत के खिलाफ न खेलने का फैसला सरकार को लेना होगा।पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस पर निर्णय नहीं कर सकता।अगर सरकार निर्देश देती है कि भारत से मुकाबला नहीं होगा।तो आईसीसी को इसे मानना पड़ेगा।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आईसीसी नहीं मानी।तो वहीं से असली टकराव शुरू होगा।यह मामला केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहेगा।
अगर फाइनल में भारत सामने आ जाए?
इस सवाल पर लतीफ ने साफ कहा कि तब भी नहीं खेलेंगे।उनके मुताबिक मैच ग्रुप का हो या फाइनल का।फैसला एक जैसा रहेगा।भारत के खिलाफ मैच नहीं खेला जाएगा।उन्होंने कहा कि आधे अधूरे फैसलों से कोई फायदा नहीं होता।इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है।
बहिष्कार का सही मौका कब निकला?
लतीफ ने बताया कि जब आईसीसी की बैठक में बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर किया गया।उसी वक्त पाकिस्तान के पास कड़ा कदम उठाने का मौका था।अगर तब विरोध किया जाता।तो उसका असर ज्यादा होता।लेकिन उस समय ऐसा नहीं हुआ।उन्होंने कहा कि देर से किया गया विरोध कमजोर साबित होता है।
बांग्लादेश मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख क्या था?
लतीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया था।लेकिन अंत में आईसीसी के फैसले को स्वीकार कर लिया गया।उस वोटिंग में 14 वोट बांग्लादेश के खिलाफ पड़े थे।इसके बाद स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया।आईसीसी ने लॉजिस्टिक और अनुबंध कारण बताए।अब वह मामला समाप्त हो चुका है।लतीफ के अनुसार अब नई रणनीति की जरूरत है।
























