शुक्रवार को अमृतसर स्थित श्री हरिमंदर साहिब में उस समय हड़कंप मच गया। परिक्रमा कर रहे दो युवकों को तर्नतारन की CIA टीम ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई अचानक की गई। आसपास मौजूद श्रद्धालु चौंक गए। SGPC के सेवादारों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। मामला तुरंत प्रशासन और SGPC के बीच टकराव में बदल गया। SGPC का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई की। प्रबंधन को कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही स्थानीय पुलिस चौकी को विश्वास में लिया गया। SGPC अधिकारियों ने कहा कि यह सिखों का सबसे पवित्र स्थल है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। किसी भी कार्रवाई से पहले प्रबंधन को सूचित करना जरूरी है। नियमों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।
दो पुलिसकर्मियों को कमरे में बंद क्यों किया गया?
पुलिस कार्रवाई के विरोध में SGPC की टास्क फोर्स सक्रिय हुई। कार्रवाई में शामिल दो पुलिसकर्मियों को रोका गया। उन्हें श्री हरिमंदर साहिब परिसर के कमरे नंबर 50 में बैठा दिया गया। SGPC का कहना था कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी स्थिति स्पष्ट नहीं करते। तब तक उन्हें जाने नहीं दिया जाएगा। यह कदम विरोध के रूप में उठाया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया। SGPC ने साफ कहा कि वह कानून के खिलाफ नहीं है। लेकिन नियमों का पालन जरूरी है। पवित्र स्थल से किसी को इस तरह उठाकर ले जाना गलत है। बिना पूछताछ और बिना सूचना कार्रवाई नहीं हो सकती। समिति ने कहा कि भविष्य में ऐसी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। जवाबदेही तय होनी चाहिए।
घटना के बाद परिसर में हालात कैसे हो गए थे?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दरबार साहिब परिसर में तनाव फैल गया। सेवादार सतर्क हो गए। श्रद्धालुओं में भी चर्चा शुरू हो गई। पुलिस और SGPC आमने-सामने दिखे। स्थिति बिगड़ने का अंदेशा बढ़ गया। किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सूचना दी गई। माहौल संवेदनशील बना रहा।
वरिष्ठ अधिकारियों के दखल से मामला कैसे सुलझा?
हालात बिगड़ते देख पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर सक्रिय हुए। SGPC अधिकारियों से संपर्क किया गया। पूरी कार्रवाई की जानकारी साझा की गई। बातचीत के जरिए गलतफहमी दूर की गई। इसके बाद SGPC ने कमरे में बंद पुलिसकर्मियों को छोड़ने का फैसला लिया। पुलिसकर्मी अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से वहां से रवाना हो गए। स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। यह घटना सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा के संतुलन पर सवाल खड़े करती है। एक ओर कानून व्यवस्था है। दूसरी ओर पवित्र स्थलों की संवेदनशीलता। SGPC ने साफ संदेश दिया है। नियमों की अनदेखी नहीं चलेगी। पुलिस के लिए भी यह चेतावनी है। भविष्य में समन्वय जरूरी होगा। नहीं तो ऐसे टकराव फिर सामने आ सकते हैं।

























