उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि पारदर्शिता जरूरी है।सरकारी नौकरी जनता के भरोसे से चलती है।इसीलिए संपत्ति का खुलासा अनिवार्य किया गया।31 जनवरी तक समय दिया गया था।इसके बाद भी 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने नियम नहीं माना।सरकार ने इसे हल्के में नहीं लिया।सीधे जनवरी की तनख्वाह रोक दी गई।
कौन से कर्मचारी कार्रवाई की जद में आए?
यह कार्रवाई किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है।राज्य के अलग अलग विभागों के कर्मचारी इसमें शामिल हैं।क्लर्क से लेकर अधिकारी तक सूची में हैं।सभी को मानव संपदा पोर्टल पर विवरण देना था।चल और अचल दोनों संपत्तियों का ब्योरा मांगा गया था।समय पर दस्तावेज अपलोड नहीं किए गए।इसी वजह से सभी की तनख्वाह अटक गई।
तनख्वाह कब तक रोकी जाएगी?
सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम पूरा होने तक भुगतान नहीं होगा।जनवरी की सैलरी पहले ही रोक दी गई है।फरवरी को लेकर भी कोई भरोसा नहीं दिया गया।जब तक कर्मचारी पोर्टल पर जानकारी नहीं देंगे।तब तक वेतन जारी नहीं होगा।सरकार किसी दबाव में नहीं है।नियम सबके लिए बराबर हैं।
क्या आगे और सख्त कार्रवाई होगी?
प्रशासन ने इशारा दिया है कि मामला यहीं खत्म नहीं होगा।अगर कर्मचारी अब भी लापरवाही करेंगे।तो अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।विभागीय जांच का रास्ता भी खुला है।सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है।भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का दावा है।इसलिए ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई।
मुख्य सचिव के आदेश क्यों नहीं माने गए?
प्रशासनिक हलकों में यही सबसे बड़ा सवाल है।मुख्य सचिव एस पी गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिए थे।समय सीमा भी साफ बताई गई थी।इसके बावजूद हजारों कर्मचारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई।या तो लापरवाही हुई या जानबूझकर टालमटोल।सरकार इसे अनुशासनहीनता मान रही है।इसीलिए कार्रवाई भी सख्त है।
इस फैसले से सिस्टम को क्या संदेश गया?
सरकार यह दिखाना चाहती है कि नियम सिर्फ कागज के लिए नहीं हैं।जो आदेश होगा उसका पालन जरूरी है।सरकारी नौकरी सुविधा नहीं जिम्मेदारी है।पारदर्शिता से ही भरोसा बनता है।संपत्ति छुपाने की कोई जगह नहीं।इस फैसले से पूरे सिस्टम में हलचल है।कर्मचारी अब सतर्क नजर आ रहे हैं।
आगे क्या बदलेगा प्रशासन में?
सरकार का मानना है कि इससे अनुशासन मजबूत होगा।भविष्य में कर्मचारी समय पर जानकारी देंगे।डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल बढ़ेगा।सिस्टम ज्यादा साफ और जवाबदेह बनेगा।भले ही अभी नाराजगी हो।लेकिन लंबी दौड़ में यही सुधार है।सौरभ द्विवेदी की नजर में यह कार्रवाई संदेश से ज्यादा चेतावनी है।

























