लगभग एक साल की अनिश्चितता के बाद मणिपुर की राजनीति ने नया मोड़ लिया है। युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ सिर्फ कुर्सी की नहीं थी। यह भरोसे की भी थी। लोगों ने इस पल को उम्मीद से देखा। इंफाल के लोक भवन में समारोह हुआ। सत्ता और विपक्ष के नेता मौजूद रहे। लंबे समय की खामोशी टूटी। राज्य को आगे बढ़ने का मौका मिला।
क्या सामाजिक संतुलन सरकार का पहला संदेश है?
नई सरकार ने शुरुआत में ही संतुलन का संकेत दिया। दो डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए गए। एक नागा समुदाय से हैं। दूसरी कुकी-जो समुदाय से हैं। इसे राजनीतिक रूप से अहम कदम माना जा रहा है। यह सिर्फ पद नहीं हैं। यह संदेश भी हैं। सरकार हर वर्ग को साथ लेकर चलने की बात कह रही है। समारोह में यह साफ दिखाई दिया। मणिपुर की विविधता को ध्यान में रखा गया।
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
युमनाम खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं। उन्हें अनुभवी नेता माना जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। शासन चलाने का अनुभव उनके पास है। राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। पार्टी के भीतर भी उनका कद बड़ा है। लोगों को उनसे स्थिरता की उम्मीद है। संकट के दौर से बाहर निकालने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है।
राष्ट्रपति शासन हटना क्यों माना जा रहा है अहम?
शपथ समारोह से कुछ घंटे पहले बड़ा फैसला लिया गया। केंद्र ने राष्ट्रपति शासन हटा दिया। फरवरी 2025 से लागू व्यवस्था समाप्त की गई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हुई। यह कदम राजनीतिक रूप से बहुत मायने रखता है। राज्य को फिर से अपनी चुनी हुई सरकार मिली। जनता की आवाज को सम्मान मिला। मणिपुर के लिए इसे नई शुरुआत माना जा रहा है।
केंद्र से सरकार को कैसा संदेश मिला?
केंद्र की ओर से नई सरकार को समर्थन का संकेत मिला। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने विकास को लेकर भरोसा जताया। कहा गया कि राज्य की समृद्धि के लिए पूरी निष्ठा से काम होगा। यह संदेश सरकार के लिए हौसला बढ़ाने वाला है। पूर्वोत्तर को लेकर केंद्र की गंभीरता दिखती है। सहयोग की भावना साफ नजर आई।
पुराने संकट से नई सरकार तक का सफर कैसा रहा?
मई 2023 से मणिपुर संकट के दौर से गुजर रहा था। हिंसा और अविश्वास का माहौल बना। पिछली सरकार पर सवाल उठे। अविश्वास प्रस्ताव की आशंका बनी। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। लोकतंत्र ठहर सा गया। अब करीब एक साल बाद राजनीतिक रास्ता खुला है। जनता नई सरकार से उम्मीद लगाए बैठी है।
क्या यह सरकार स्थिरता दे पाएगी?
सबसे बड़ा सवाल अब आगे का है। क्या नई सरकार हालात संभाल पाएगी। क्या ज़मीनी स्थिति सुधरेगी। लोग शांति और सुरक्षा चाहते हैं। विकास की ज़रूरत है। समुदायों के बीच भरोसा बनाना बड़ी चुनौती है। सरकार के फैसले अहम होंगे। मणिपुर की निगाह अब अपने नए नेतृत्व पर टिकी है।























