चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी के मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा के घर के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मामला कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के पिता को लेकर इस्तेमाल किए गए शब्दों से जुड़ा था। आप नेताओं ने कहा कि यह कोई साधारण टिप्पणी नहीं है। यह मेहनत करके जीवन चलाने वाले लोगों का अपमान है। इसी वजह से सड़कों पर उतरना पड़ा। बैंड-बाजों के साथ विरोध प्रतीकात्मक था। राजनीति में तनाव तेज हो गया।
क्या दलित सम्मान दांव पर है?
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि दलितों का अपमान करना कांग्रेस की आदत बन चुकी है। उन्होंने मांग रखी कि कांग्रेस 24 घंटे में माफी मांगे। तय समय बीत गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस चुप्पी ने गुस्सा और बढ़ा दिया। आप का कहना है कि बात सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है। पूरे दलित समाज की गरिमा की है। इसी कारण विरोध और तेज हुआ।
क्या मेहनत का मजाक उड़ाया गया?
आप नेताओं ने कहा कि किसी के काम का मजाक उड़ाना शर्मनाक है। बैंड बजाना हो या कोई और काम, हर ईमानदार मेहनत सम्मान की हकदार है। उन्होंने कहा कि गरीब घरों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़े हैं। यही बात कुछ नेताओं को चुभती है। इसी कारण तंज और अपमानजनक भाषा सामने आती है। आप ने साफ कहा कि यह सोच अब नहीं चलेगी। पंजाब इसे स्वीकार नहीं करेगा।
क्या परिवारवाद जड़ में है?
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि पुरानी पार्टियां परिवारवाद से चलती रही हैं। सत्ता कुछ गिने-चुने घरों तक सीमित रही। आम लोगों को आगे आने का मौका नहीं मिला। आप ने आम घरों के युवाओं को जिम्मेदारी दी। आज कैबिनेट में दलित मंत्री हैं। यही बदलाव कुछ नेताओं को हजम नहीं हो रहा। इसी वजह से धमकी और तंज वाली राजनीति हो रही है। यहीं से विवाद गहराता है।
क्या पुलिस कार्रवाई ने नाराजगी बढ़ाई?
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आप कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ। हालात धीरे-धीरे तनावपूर्ण बन गए। पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कई कार्यकर्ता घायल हुए। कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई से रोष और बढ़ गया। आप का कहना है कि आवाज दबाई नहीं जा सकती। सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी। सड़कों पर सवाल उठते रहेंगे।
क्या यह पुरानी सोच की दोहराई है?
यह पहला मौका नहीं है। कांग्रेस के भीतर से भी दलित प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नेताओं ने खुद माना है कि ऊंचे पदों पर दलितों की संख्या कम है। यह दलित समाज की घुटन को दिखाता है। दूसरी ओर आप सरकार में दलितों को जगह मिली। यही फर्क राजनीति की दिशा बदल रहा है। लोग सब कुछ देख रहे हैं और समझ भी रहे हैं।
क्या 2027 का संदेश साफ है?
आप नेताओं का कहना है कि दलित समाज अब चुप नहीं रहेगा। सम्मान और बराबरी उसकी सबसे बड़ी मांग है। 2022 की तरह 2027 में भी फैसला जनता करेगी। कांग्रेस की भाषा और रवैये का हिसाब होगा। जमीन पर माहौल बदल रहा है। दलित समाज का संदेश साफ है। अपमान नहीं, सम्मान चाहिए।























