यह मामला तब गरमाया जब कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने संसद में दावा किया कि उनके पास जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब की एक प्रति मौजूद है। उन्होंने कहा कि किताब में गलवान विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र है। इस दावे के बाद लोकसभा में हंगामा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। लोग सवाल करने लगे कि जब किताब प्रकाशित नहीं हुई, तो कॉपी आई कहां से। विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया।
सरकार ने शुरुआत में क्या कहा?
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने पहले कहा था कि ऐसी कोई किताब आधिकारिक रूप से मौजूद नहीं है। उनका कहना था कि पुस्तक को अभी जरूरी मंजूरी नहीं मिली है। इसके जवाब में राहुल गांधी ने पेंगुइन के पहले बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया। इससे संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। कई सांसदों को निलंबित भी किया गया। मामला पूरी तरह सियासी टकराव में बदल गया।
पेंगुइन ने दूसरे बयान में क्या स्पष्ट किया?
Penguin Random House India ने 24 घंटे के भीतर दूसरा स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने कहा कि किसी भी किताब के तीन चरण होते हैं। पहला चरण किताब की घोषणा का होता है। दूसरा चरण प्री-ऑर्डर का होता है, जिसमें पाठक पहले से बुक कर सकते हैं, लेकिन किताब छपी नहीं होती। तीसरा चरण वास्तविक प्रकाशन का होता है। किताब तभी प्रकाशित मानी जाती है जब वह दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद के लिए उपलब्ध हो।
क्या ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ प्रकाशित हो चुकी है?
पेंगुइन ने साफ दोहराया कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। कोई भी प्रिंट या डिजिटल कॉपी आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है। कंपनी ने कहा कि प्री-ऑर्डर और पब्लिकेशन को एक जैसा समझना गलत है। सोशल मीडिया पर घूम रही फाइलें अवैध हैं। पेंगुइन ने चेतावनी दी कि कॉपीराइट उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मीडिया और प्लेटफॉर्म से सावधानी बरतने की अपील भी की गई।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
Delhi Police ने सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर किताब की पीडीएफ या प्री-प्रिंट कॉपी फैलने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि पुस्तक को रक्षा मंत्रालय से जरूरी अनुमति नहीं मिली थी। स्पेशल सेल इस बात की जांच कर रही है कि लीक कैसे हुआ। यह भी देखा जा रहा है कि किन प्लेटफॉर्म पर कवर इस तरह दिखाया गया जैसे किताब बिक्री के लिए तैयार हो। जांच जारी है।
जनरल नरवणे ने क्या कहा?
जनरल नरवणे ने भी इस विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने पेंगुइन का आधिकारिक बयान सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति यही है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है। विवाद के बीच यह साफ हो रहा है कि संवेदनशील हिस्सों के लीक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पेंगुइन का बार-बार स्पष्टीकरण यह दिखाता है कि वे स्थिति को स्पष्ट रखना चाहते हैं। अब जांच के नतीजे तय करेंगे कि आगे क्या कार्रवाई होती है।























