नई दिल्ली : मध्य पूर्व में परमाणु खतरे की चर्चा फिर तेज हो गई है। ईरान के पूर्व इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स कमांडर हुसैन कनानी ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के पास परमाणु बम है। उनके मुताबिक इस बात की जानकारी अमेरिका और इजरायल दोनों को है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बना रहा है। ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता भी जारी है। ऐसे माहौल में यह दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
सऊदी अरब के पास भी परमाणु बम है?
हुसैन कनानी ने कहा कि उनके पास खुफिया जानकारी है। उन्होंने दावा दोहराते हुए कहा कि सऊदी के पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विशेषज्ञ इसे ईरान की रणनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं। फिर भी इस दावे ने परमाणु संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान बम बनाए तो सऊदी भी बनाएगा?
सऊदी अरब लंबे समय से ईरान को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले भी कह चुके हैं कि यदि ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी भी ऐसा करेगा। सऊदी का परमाणु कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर नागरिक उपयोग के लिए बताया जाता है। इसमें बिजली उत्पादन और जल शुद्धिकरण परियोजनाएं शामिल हैं। लेकिन वह पूर्ण परमाणु ईंधन चक्र की मांग कर चुका है। यही बिंदु विवाद का कारण बना हुआ है।
क्या एनपीटी नियमों का उल्लंघन होगा?
सऊदी अरब परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी का सदस्य है। यह संधि परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाती है। फिलहाल सऊदी के पास कोई चालू परमाणु रिएक्टर नहीं है। लेकिन 2040 तक दो बड़े रिएक्टर बनाने की योजना है। अमेरिका ने नागरिक परमाणु सहयोग के लिए समझौता किया है। हालांकि यूरेनियम संवर्धन को लेकर मतभेद बने हुए हैं। यदि दावा सही साबित हुआ तो यह संधि की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगा।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि कनानी के दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA ने भी इस पर टिप्पणी नहीं की है। कई विश्लेषक इसे ईरान की राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं। उनका मानना है कि यह बयान अमेरिका की नीतियों को दोहरे मानदंड वाला दिखाने की कोशिश हो सकता है। ईरान यह सवाल उठा रहा है कि यदि सऊदी को छूट है तो उसे क्यों नहीं।
अब तक अमेरिका ने इस दावे का औपचारिक खंडन नहीं किया है। इसे कुछ लोग रणनीतिक चुप्पी बता रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और सऊदी नेतृत्व के रिश्ते मजबूत माने जाते हैं। ओमान वार्ता में ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को अलग रखने की मांग कर रहा है। ऐसे में यह बयान बातचीत के माहौल को प्रभावित कर सकता है। यदि क्षेत्र में परमाणु दौड़ शुरू हुई तो तुर्की और मिस्र जैसे देश भी कदम बढ़ा सकते हैं। फिलहाल दुनिया इस दावे की सच्चाई और इसके असर पर नजर रखे हुए है।























