बरसाना की होली लठमार होली कहलाती है।महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों को लाठियां मारती हैं।पुरुष ढाल से बचते हैं।यह परंपरा राधा-कृष्ण कथा से जुड़ी है।भक्ति और रंग का संगम दिखता है।देश-विदेश से लोग आते हैं।अनुभव अनोखा लगता है। काशी में होली आध्यात्म और मस्ती का संगम है।घाट रंगों से भर जाते हैं।भांग और ठंडाई माहौल बनाते हैं।ढोल-नगाड़े जश्न बढ़ाते हैं।शिव भक्त भी रंगों में रंगते हैं।गलियां रंगीन हो जाती हैं।होली यादगार बनती है। शांतिनिकेतन में बसंत उत्सव मनाया जाता है।विद्यार्थी पीले कपड़े पहनते हैं।गीत-संगीत और नृत्य होता है।टैगोर से परंपरा जुड़ी है।शांत माहौल इसे खास बनाता है।कला और संस्कृति का मेल दिखता है।होली अलग पहचान रखती है।
क्या उदयपुर शाही होली आकर्षक?
उदयपुर में होली राजसी अंदाज में होती है।मेवाड़ परंपराएं जीवित हैं।होलिका दहन के साथ जुलूस निकलते हैं।सजे हाथी-घोड़े आकर्षण बनते हैं।राजसी पोशाक माहौल सजाती है।नृत्य-संगीत जश्न बढ़ाते हैं।पर्यटक आकर्षित होते हैं। प्रयागराज में कपड़ा फाड़ होली प्रसिद्ध है।मोहल्लों में लोग मिलकर रंग खेलते हैं।मस्ती में कपड़े फाड़े जाते हैं।संगीत माहौल बनाता है।संगम नगरी रंगीन होती है।भाईचारे से त्योहार मनाया जाता है।अनुभव जीवंत लगता है।
क्या होली रिश्तों का पर्व?
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं।दिलों की दूरी कम होती है।गिले-शिकवे भुलाए जाते हैं।रिश्तों में मिठास आती है।हर राज्य की अपनी परंपरा है।त्योहार खास बनता है।मिलन का पर्व कहा जाता है। भारत की होली हर जगह अलग दिखती है।हर शहर की पहचान अलग है।पर्यटकों के लिए नया अनुभव बनता है।संस्कृति का परिचय मिलता है।स्थानीय परंपराएं जानने को मिलती हैं।त्योहार यादगार बनता है।पर्यटन बढ़ता है।
























