पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब नई दिशा में है। पहले ध्यान सिर्फ गिरफ्तारी पर था। अब फोकस सजा दिलाने पर है। सरकार ने नीति बदली है। जांच को मजबूत बनाया गया है। हर केस को कानूनी रूप से पक्का किया जा रहा है। इससे तस्करों के बचने की गुंजाइश कम हुई है। यही बदलाव पूरे सिस्टम में दिख रहा है।
सजा दर इतनी तेजी से कैसे बढ़ी?
आंकड़े बताते हैं कि सजा दर लगातार बढ़ रही है। 2022 में करीब 80 प्रतिशत मामलों में सजा हुई। 2023 में यह और बढ़ी। 2024 में यह 85 प्रतिशत तक पहुंच गई। 2025 में 88 प्रतिशत का आंकड़ा छू लिया गया। 2026 में अब तक यह करीब 89 प्रतिशत है। यह देश में सबसे ज्यादा है।
पुलिसिंग में क्या बड़ा बदलाव आया?
पुलिसिंग का तरीका पूरी तरह बदला गया है। अब जांच अभियोजन के हिसाब से होती है। वैज्ञानिक सबूत जुटाए जाते हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है। नेटवर्क की आर्थिक जांच भी होती है। हर केस को मजबूत बनाने पर जोर है। ताकि अदालत में केस टिक सके। यही वजह है कि सजा दर बढ़ी है।
क्या सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं थी?
पहले हजारों गिरफ्तारियां होती थीं। लेकिन सजा कम होती थी। इससे तस्करों में डर नहीं था। अब स्थिति बदली है। अधिकारी साफ कह रहे हैं कि असली सफलता सजा है। जब अपराधी को यकीन होगा कि जेल तय है। तभी डर बनेगा। यही सोच अब सिस्टम में लागू हो रही है।
जांच में किन नियमों पर जोर?
NDPS कानून बहुत सख्त है। इसमें प्रक्रिया का पालन जरूरी है। छोटी गलती भी केस कमजोर कर सकती है। इसलिए जांच में हर नियम का पालन किया जा रहा है। सबूतों की सुरक्षा पर ध्यान है। फोरेंसिक जांच को मजबूत किया गया है। ताकि अदालत में केस कमजोर न पड़े।
क्या टेक्नोलॉजी और जनता भी जुड़ी?
अब पुलिस सिर्फ अपने दम पर काम नहीं कर रही। टेक्नोलॉजी का बड़ा रोल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से जानकारी मिल रही है। लोग भी सूचना दे रहे हैं। गुमनाम शिकायत सिस्टम काम कर रहा है। इससे नेटवर्क पकड़ने में मदद मिली है। संगठित तस्करी पर चोट हो रही है।
क्या यह मॉडल बाकी राज्यों के लिए मिसाल?
अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल सफल है। पंजाब तस्करी के बड़े रूट पर है। फिर भी यहां सुधार हुआ है। यह दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है। साफ संदेश दिया गया है। तस्कर बच नहीं पाएंगे। गिरफ्तारी के साथ सजा और संपत्ति जब्ती तय है। यही असली डर है।

























