मिडल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब सीधे भारत के एविएशन सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। वैश्विक तेल सप्लाई में रुकावट आने से ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे एयरलाइंस की लागत में जबरदस्त उछाल आया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो देश की कई बड़ी एयरलाइंस बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ी वजह
इस संकट की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुई बाधाएं हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई के लिए जिम्मेदार है। यहां तनाव और रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल, जो पहले 70 डॉलर के आसपास था, अब 110 डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। इस उछाल का सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर पड़ा है।
ATF कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
FIA के अनुसार, ATF की कीमतों में करीब 295 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। यह किसी भी एयरलाइन के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है, क्योंकि कुल खर्च का बड़ा हिस्सा ईंधन पर ही निर्भर करता है। पहले जहां यह लागत 30 से 40 प्रतिशत के बीच रहती थी, अब यह बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि हर उड़ान अब एयरलाइंस के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है।
डॉलर के मुकाबले गिरा रुपया
संकट को और गहरा बनाने वाला एक और कारण है भारतीय रुपये की कमजोरी। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से एयरलाइंस के खर्च में और इजाफा हो गया है। क्योंकि विमान ईंधन और कई अन्य सेवाओं का भुगतान डॉलर में किया जाता है, इसलिए रुपये की गिरावट सीधे एयरलाइंस की जेब पर भारी पड़ रही है। इससे कंपनियों की वित्तीय हालत और ज्यादा खराब हो गई है।
उड़ानें चलाना हुआ मुश्किल
फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने सरकार को अपने पत्र में साफ कहा है कि मौजूदा हालात में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है। खासकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में हाल ही में प्रति लीटर 70 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इससे एयरलाइंस को हर उड़ान पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार से तीन बड़ी मांगें
इस संकट से उबरने के लिए FIA ने सरकार के सामने तीन अहम मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि ‘क्रैक बैंड’ फॉर्मूले को फिर से लागू किया जाए, जिससे ईंधन की कीमतों को संतुलित किया जा सके। दूसरी मांग है कि घरेलू उड़ानों पर लगने वाली 11 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी को कुछ समय के लिए हटाया जाए। तीसरी मांग है कि राज्यों में वैट (VAT) की दरों को कम किया जाए, क्योंकि कई बड़े शहरों में यह 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
बड़े शहरों में ज्यादा बोझ
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से देश की आधे से ज्यादा उड़ानें संचालित होती हैं। लेकिन इन राज्यों में वैट की दरें बहुत ज्यादा हैं, जिससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। FIA का कहना है कि अगर इन राज्यों में टैक्स कम किया जाए, तो एयरलाइंस को राहत मिल सकती है और सेक्टर को संभालने में मदद मिल सकती है।
IndiGo और Air India जैसी बड़ी कंपनियां भी इस संकट से अछूती नहीं हैं। लगातार बढ़ती लागत और घटती कमाई के कारण इन कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में उड़ानों की संख्या घट सकती है या किराए में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
यात्रियों पर भी पड़ेगा असर
अगर एयरलाइंस इस संकट से नहीं उबर पाती हैं, तो इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं और कई रूट्स पर उड़ानें कम हो सकती हैं। इससे आम लोगों के लिए हवाई यात्रा महंगी और मुश्किल हो जाएगी। पर्यटन और व्यापार पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर सरकार के फैसले पर टिकी है। क्या सरकार एयरलाइंस को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाएगी या फिर यह संकट और गहराएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो भारत का एविएशन सेक्टर एक बड़े संकट में फंस सकता है। आने वाले कुछ महीने इस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम साबित होंगे।























