राजधानी नई दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 75 साल पूरे होने का भव्य आयोजन चल रहा था। यह कार्यक्रम भारतीय शूटिंग के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें देश के कई बड़े खिलाड़ी और अधिकारी मौजूद थे। इस मंच पर सबसे ज्यादा ध्यान मनु भाकर पर था, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन किया है। माहौल पूरी तरह खेल भावना से भरा हुआ था, लेकिन एक सवाल ने अचानक सबका ध्यान भटका दिया।
अचानक आया क्रिकेट से जुड़ा सवाल
समारोह के दौरान एक रिपोर्टर ने मनु भाकर से उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर उनकी राय पूछ ली। यह सवाल सुनते ही कई लोग हैरान रह गए, क्योंकि यह पूरी तरह शूटिंग के मंच से अलग विषय था। इंडियन प्रीमियर लीग में चर्चा में आए इस युवा खिलाड़ी को लेकर सवाल पूछना कई लोगों को अनुचित लगा। इससे यह भी महसूस हुआ कि भारत में किसी भी मंच पर बातचीत का रुख आसानी से क्रिकेट की ओर मुड़ जाता है।
मनु भाकर का शांत और परिपक्व जवाब
अचानक आए इस सवाल पर मनु भाकर ने बेहद संतुलित और परिपक्व प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी नाराजगी के कहा कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और सही मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी खिलाड़ी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उनका यह जवाब न केवल विनम्र था, बल्कि खेल भावना का बेहतरीन उदाहरण भी था। इस प्रतिक्रिया ने यह भी दिखाया कि वह सिर्फ एक खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक समझदार व्यक्तित्व भी हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
हालांकि मनु भाकर के जवाब की खूब सराहना हुई, लेकिन सवाल पूछने वाले पत्रकार को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक ओलंपिक स्तर के मंच पर क्रिकेट से जुड़ा सवाल पूछना अन्य खेलों का अपमान है। कई लोगों ने इसे भारत की ‘क्रिकेट केंद्रित मानसिकता’ का उदाहरण बताया।
विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल
खेल विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि भारत में क्रिकेट को इतना ज्यादा महत्व दिया जाता है कि अन्य खेलों की उपलब्धियां अक्सर पीछे छूट जाती हैं। कई विशेषज्ञों ने कहा कि अगर इसी तरह का रवैया जारी रहा, तो अन्य खेलों को वह पहचान नहीं मिल पाएगी, जिसके वे हकदार हैं। यह बहस नई नहीं है, लेकिन इस घटना ने इसे फिर से सामने ला दिया है।























