नई दिल्ली. विपक्षी दलों का कहना है कि धनखड़ की अध्यक्षता में राज्यसभा की बहस का स्तर गिरा है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चेयरमैन का रवैया पक्षपातपूर्ण है और विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई में निष्पक्षता का अभाव दिखा है। इस स्थिति में कुछ दलों ने औपचारिक रूप से असंतोष जाहिर करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात की है।
सहमति की कमी
अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। कुछ दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और कहा है कि पहले इसे आंतरिक रूप से सुलझाया जाना चाहिए। वहीं, कुछ विपक्षी दलों का मानना है कि यह कदम जल्दबाजी में नहीं उठाया जाना चाहिए क्योंकि इसका असर अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर पड़ सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव का महत्व
अविश्वास प्रस्ताव संसद की एक प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी अधिकारी के खिलाफ असंतोष प्रकट किया जाता है। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो उस अधिकारी को अपने पद से हटना पड़ता है। इसका उद्देश्य संसद में ईमानदार और जवाबदेह नेतृत्व सुनिश्चित करना है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके अगले कदमों का इंतजार किया जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच चर्चा अभी जारी है। कुछ दल इसे गंभीरता से विचार कर रहे हैं, जबकि अन्य दल इसका विरोध कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।























