इसरो ने एक बार फिर बड़ी छलांग लगाई है। इसरो ने अपने नए मिशन पीएसएलवी रॉकेट का उपयोग करते हुए ‘अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग’ को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से ठीक 10 बजे हुआ। इस मिशन को स्पैडेक्स नाम दिया गया है। इसरो ने स्पैडेक्स मिशन के तहत 229 टन के पीएसएलवी रॉकेट से दो छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है। ये उपग्रह 470 किमी की ऊंचाई पर डॉक और अनडॉक होंगे।
डॉकिंग और अनडॉकिंग प्रक्रिया
इसरो ने कहा कि पीएसएलवी रॉकेट दो अंतरिक्ष यान – अंतरिक्ष यान ए (एसडीएक्स01) और अंतरिक्ष यान बी (एसडीएक्स02) को एक ऐसी कक्षा में ले जाएगा, जो उन्हें पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थापित करेगा। बाद में, इसरो मुख्यालय में वैज्ञानिक इन्हें तीन मीटर के करीब लाने का प्रयास करेंगे, जिसके बाद ये पृथ्वी से लगभग 470 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक में विलीन हो जाएंगे। इस प्रक्रिया को डॉकिंग कहा जाता है। इसके बाद ये दोनों उपग्रह भी अलग हो जाएंगे, यानी अनडॉकिंग हो जाएगी।
भारत ने डॉकिंग प्रणाली का पेटेंट कराया
अंतरिक्ष की दुनिया में केवल रूस, अमेरिका और चीन ही स्वचालित डॉकिंग और अनडॉकिंग की तकनीक में महारत हासिल कर पाए हैं। अब भारत भी इस समूह में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। भारत के लिए यह गर्व की बात है कि इसरो ने अब इस डॉकिंग प्रणाली का पेटेंट करा लिया है। क्योंकि, आमतौर पर कोई भी देश डॉकिंग और अनडॉकिंग के जटिल विवरणों को साझा नहीं करता है। इसलिए, इसरो को अपना स्वयं का डॉकिंग तंत्र बनाना पड़ा।

























