वैश्विक बाजारों में बिकवाली और विदेशी फंडों की निरंतर निकासी के बीच मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में बिकवाली से भी निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 468.14 अंक गिरकर 77,779.99 अंक पर आ गया। एनएसई निफ्टी 117.05 अंक गिरकर 23,527.85 पर आ गया।
30 ब्लू-चिप कंपनियों में टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, जोमैटो, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। कोटक महिन्द्रा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील ने मुनाफा दर्ज किया है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 1,893.16 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
एशियाई बाजारों में सियोल और शंघाई में गिरावट रही, जबकि हांगकांग में तेजी रही। सोमवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.30 प्रतिशत बढ़कर 74.39 डॉलर प्रति बैरल हो गया। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सोमवार को 450.94 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 78,248.13 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 168.50 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,644.90 पर बंद हुआ।
डॉलर के मुकाबले रुपए की हालत
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 9 पैसे गिरकर 85.61 पर आ गया। व्यापारियों ने कहा कि फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख और “ट्रम्प फैक्टर” के कारण डॉलर सूचकांक (डीएक्सवाई) और अमेरिका के 10-वर्षीय प्रतिफल में बढ़ोतरी के कारण रुपया लगातार दबाव में रहा है।
इसके अलावा घरेलू मोर्चे पर धीमी विकास दर, बढ़ता व्यापार घाटा और लगातार विदेशी फंड के बाहर जाने से रुपये का अवमूल्यन और बढ़ गया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 85.54 पर कमजोरी के साथ खुला और फिर आयातकों और तेल विपणन कंपनियों की माह के अंत में डॉलर मांग के कारण अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 85.61 तक गिर गया। जो पिछले बंद के मुकाबले 9 पैसे की गिरावट दर्शाता है।

























