नई दिल्ली. हिंदी को लेकर डीएमके सांसदों के विरोध के बीच सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषा को लेकर लचीला रुख अपनाया गया है। सरकार ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाओं को उनके राज्य, क्षेत्र और पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। अपनी प्रतिक्रिया में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि जो छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान तीन भाषाओं में से एक या अधिक को बदलना चाहते हैं, वे कक्षा 6 या 7 में ऐसा कर सकेंगे, लेकिन उन्हें माध्यमिक विद्यालय के अंत तक पहले से चुनी गई भाषाओं में बुनियादी दक्षता दिखानी होगी।
किसी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी
डीएमके के हिंदी विरोध के बीच सरकार की ओर से एक लिखित सवाल के जवाब में सरकार ने राज्यसभा में कहा कि बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाएं उनके राज्य, क्षेत्र और पाठ्यक्रम से संबंधित होंगी। तीन-भाषा फार्मूले के तहत किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी, बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली भाषाएं राज्यों और छात्रों की पसंद होंगी: शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया।
सरकार पर लगातार हमला बोल रही डीएमके
डीएमके इस मुद्दे पर लगातार सरकार पर हमला बोल रही है और सदन के अंदर और बाहर राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े त्रिभाषा फॉर्मूले का लगातार विरोध कर रही है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांतो मजूमदार ने एक अन्य संबंधित प्रश्न में कहा कि एनईपी 2020 छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने का विकल्प देता है, बशर्ते कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की हों। इससे पहले बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत में डीएमके सांसदों ने तमिलनाडु में एनईपी लागू करने को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान को लेकर लोकसभा में भारी हंगामा किया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने डीएमके पर इस मुद्दे पर राजनीति करने और छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था, हालांकि डीएमके सांसदों के विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान को अपने कुछ बयानों पर खेद व्यक्त करना पड़ा था।

























