अंतरराष्ट्रीय खबरें: अंतरिक्ष अब सिर्फ़ रिसर्च या सैटेलाइट की दुनिया नहीं रह गया है. यह हथियारों का अड्डा भी बनता जा रहा है. चीन और अमेरिका जैसे ताकतवर देश अंतरिक्ष को हथियारों से लैस कर रहे हैं. दोनों देश इस समय एक खामोश लेकिन बेहद खतरनाक अंतरिक्ष युद्ध की तैयारी कर रहे हैं. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि दोनों देशों के बीच हो रही बयानबाजी ये बयां कर रही है. हाल ही में खुद अमेरिकी जनरल ने कहा कि चीन 30 साल से अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की तैयारी कर रहा है.
ऐसे में दोनों देश खुद को और मजबूत बनाने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, अंतरिक्ष में एक तरफ अमेरिका का गोल्डन डोम है। एक हाईटेक रक्षा कवच, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में तैयार किया जा रहा है। दूसरी तरफ चीन की ड्रैगन आर्मी है। एक सैन्य योजना जो पिछले 30 सालों से अमेरिका की अंतरिक्ष शक्ति को कमजोर करने की तैयारी कर रही है। आइए, इस रिपोर्ट में आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों देशों की क्या रणनीति है और अंतरिक्ष में किसकी पकड़ ज्यादा मजबूत है।
अंतरिक्ष में अमेरिका का नया सुरक्षा कवच
अमेरिका ने हाल ही में एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना गोल्डन डोम का ऐलान किया है। इजरायल के आयरन डोम की तर्ज पर बन रहे इस सिस्टम को जमीन और अंतरिक्ष दोनों जगह तैनात किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य 2029 तक इस कवच को पूरी तरह तैयार कर लेना है। यूएस स्पेस कमांड के जनरल स्टीफन व्हिटिंग का कहना है कि चीन पिछले 30 सालों से अमेरिका के स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। चीन के पास ऑर्बिटल एंटी-सैटेलाइट हथियार, जैमिंग सिस्टम और डायरेक्ट एसेंट मिसाइल हैं जो अमेरिकी सैन्य सैटेलाइट को अंधा कर सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका अब तेजी से अपने डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। चीन अंतरिक्ष में कई अन्य बेहतरीन तैयारियां भी कर रहा है। इसमें उसे रूस का भी समर्थन हासिल है।
2027 में कुछ बड़ा होने की संभावना है
जनरल व्हाइटिंग के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अमेरिका को भी उसी स्तर पर तैयारी करनी होगी। अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो यह युद्ध सिर्फ जमीन पर ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष में भी लड़ा जाएगा। वहीं, अमेरिका ने चीन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ चीन अंतरिक्ष के सैन्यीकरण का विरोध करता है। दूसरी तरफ उसने हाई एनर्जी लेजर, सैकड़ों जासूसी सैटेलाइट और काइनेटिक मिसाइलें तैनात कर रखी हैं। चीन के 2007 के एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के बाद भी अंतरिक्ष में मलबा फैल रहा है, जिससे दूसरे सैटेलाइट्स को खतरा है।
क्या अंतरिक्ष युद्ध का मैदान बन जाएगा?
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांतों का उल्लंघन है। जवाब में जनरल व्हिटिंग ने कहा कि जब चीन और रूस खुद ऐसे हथियार बना रहे हैं, तो उनकी आपत्ति हास्यास्पद है। जनरल व्हिटिंग का कहना है कि अंतरिक्ष में युद्ध को रोकने का सबसे अच्छा तरीका इसके लिए तैयार रहना है। अमेरिका अब अंतरिक्ष में संभावित सैन्य संघर्ष की तैयारी कर रहा है। गोल्डन डोम उसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को अंधा करने वाले किसी भी हमले से बच सके।
चीन और अमेरिका में कौन अधिक शक्तिशाली है?
अंतरिक्ष अब सिर्फ़ वैज्ञानिक उपलब्धियों का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक सैन्य रणनीति का अहम मोर्चा बन गया है। जब अंतरिक्ष की बात आती है, तो माना जाता है कि चीन अमेरिका से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली है। इसीलिए अपनी शक्ति बढ़ाने और चीन से मुक़ाबला करने के लिए अमेरिका अंतरिक्ष में भी गोल्डन डोम लगाने की कोशिश कर रहा है। इसका मतलब यह है कि दोनों में चीन स्पष्ट रूप से ज़्यादा शक्तिशाली देश है, क्योंकि यह गोल्डन डोम अभी तक अंतरिक्ष में स्थापित नहीं हुआ है। इसके स्थापित होने के बाद दोनों देश निश्चित रूप से बराबर की अंतरिक्ष शक्ति बन जाएँगे।

























