International News: अमेरिका के लॉस एंजिल्स शहर में सोमवार देर रात स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई, जब हजारों लोग अप्रवासी नागरिकों के खिलाफ चल रही सरकारी छापेमारी के विरोध में सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन कुछ ही देर में हिंसक हो गया, जिसके बाद मेयर करेन बास को शहर के डाउनटाउन इलाके में आपातकाल और कर्फ्यू लगाना पड़ा।
कर्फ्यू का समय तय, कई दिनों तक लागू रह सकता है
मेयर कैरेन बास ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि कर्फ्यू मंगलवार रात 8 बजे से बुधवार सुबह 6 बजे तक लागू रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर हिंसा पर काबू नहीं पाया गया तो इस प्रतिबंध को आने वाले दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह फैसला डाउनटाउन में तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बाद लिया गया।
देश के कई शहरों में फैली विरोध प्रदर्शन की आग, यातायात ठप
प्रदर्शन की लपटें लॉस एंजिल्स ही नहीं बल्कि सिएटल, शिकागो, ऑस्टिन और वाशिंगटन डीसी जैसे शहरों तक पहुंच गई हैं। फेडरल बिल्डिंग के आसपास यातायात पूरी तरह से ठप है और कई इलाकों में सार्वजनिक परिवहन सेवा भी बाधित हुई है। सड़कों पर नारेबाजी और झंडे जलाने जैसी घटनाओं ने पूरे देश में नागरिक असंतोष का माहौल बना दिया है।
राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान: यह राष्ट्रीय सम्मान पर हमला है
ट्रंप ने इस पूरी घटना को गंभीर बताते हुए कहा, ”यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि अमेरिका की संप्रभुता पर सीधा हमला है।” उन्होंने आगे कहा कि वह जल्द ही सीनेट में झंडा जलाने वालों को एक साल की सजा देने का कानून पेश करेंगे। विरोधियों पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा, ”ये प्रदर्शनकारी आम नागरिक नहीं, बल्कि पेशेवर उपद्रवी हैं।”
नेशनल गार्ड की तैनाती से आग और भड़क गई
सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए नेशनल गार्ड और मरीन सैनिकों को तैनात किया है, लेकिन इसका असर उल्टा हुआ। कई नागरिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कदम को “तानाशाही रवैया” बताते हुए और भी उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सैन्य तैनाती के बाद विरोध प्रदर्शन पहले से भी ज़्यादा आक्रामक हो गए हैं। लॉस एंजिल्स की सड़कों पर चल रही इस जंग ने अमेरिका में नागरिक अधिकारों, अप्रवास नीति और सत्ता के रवैये पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह लोकतंत्र की आवाज है या कानून व्यवस्था पर हमला? आने वाले दिन इस सवाल का जवाब देंगे।























