Business News: पहाड़ों की गुफाओं से निकलकर योग अब एयर-कंडीशन्ड स्टूडियो और ऑनलाइन ऐप्स तक पहुंच चुका है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का योग और वेलनेस उद्योग 2024 में ₹20,000 करोड़ का हो गया, जो सालाना 12% की दर से बढ़ रहा है। शहरी तनाव, कोविड के बाद की जागरूकता और ग्लोबल डिमांड ने इस ग्रोथ को नई रफ्तार दी है। अब कॉर्पोरेट दफ्तरों में भी योग सत्र आम हो गए हैं, जहाँ कर्मचारी मानसिक तनाव कम करने के लिए इसे अपना रहे हैं। मेट्रो शहरों में सुबह-सुबह पार्कों में योग करने वालों की संख्या में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। यह बदलाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक में ‘इंडियन योगा ट्रेनर्स’ की मांग लगातार बढ़ रही है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि योग अब न सिर्फ जीवनशैली का हिस्सा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का भी अहम स्तंभ बन चुका है।
ऋषिकेश से वैश्विक सर्टिफिकेशन तक
ऋषिकेश, हरिद्वार और मैसूर जैसे शहर आज विश्वस्तरीय योग हब बन चुके हैं। सिर्फ ऋषिकेश में ही 900 से ज़्यादा पंजीकृत योग स्कूल हैं, जहां विदेशी छात्र RYT 200 और RYT 500 जैसी प्रमाणित ट्रेनिंग लेते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल 2 लाख से ज़्यादा विदेशी नागरिकों ने भारत में योग सीखा। कोरोना महामारी के बाद योग डिजिटल हो गया। YouTube चैनल, ऐप्स और सब्सक्रिप्शन प्लेटफॉर्म जैसे SARVA, Cure.Fit और Patanjali Yoga ऐप ने घर-घर योग पहुंचाया। 2026 तक भारत का योग-टेक उद्योग ₹6,500 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। अमेरिका के Apple Fitness+ और YouTube की ‘Yoga with Adriene’ जैसे ब्रांड अब भारतीय प्रशिक्षकों से जुड़ रहे हैं।
योग गुरुओं की बढ़ती मांग और स्टार्टअप क्रांति
आज एक योग प्रशिक्षक ₹50,000 से ₹2 लाख तक कमा सकता है। Patanjali, Sri Sri Tattva और Kama Ayurveda जैसे ब्रांड योग को अपने बिज़नेस मॉडल का हिस्सा बना रहे हैं। स्टार्टअप फंडिंग, रिट्रीट सेंटर और आयुर्वेदिक उत्पाद इस विस्तार को और ताकत दे रहे हैं। भारत सरकार ने योग को वैश्विक मंच पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आयुष मंत्रालय के जरिए ‘Yoga for Humanity’ जैसी मुहिम और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप से विदेशी दिलचस्पी बढ़ी है। 2025 में सरकार ने आयुष के लिए ₹1,400 करोड़ का बजट रखा, जिसमें बड़ा हिस्सा योग को मिला।
मान्यता और गुणवत्ता: एक चुनौती भी
बढ़ती मांग के साथ चुनौती आई है मानकीकरण की। Quality Council of India ने योग ट्रेनर्स के लिए प्रमाणन स्कीम शुरू की है, जबकि WHO भारत के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय योग मानकों पर काम कर रहा है। जो योग कभी साधना का प्रतीक था, आज IPO की ओर बढ़ रहा है। कई ब्रांड शेयर मार्केट में उतरने की तैयारी में हैं। योग अब सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, एक आर्थिक शक्ति बन चुका है—जो शरीर, मन और बाज़ार तीनों को जोड़ रहा है।























