Sports News: पृथ्वी शॉ, जिन्हें कभी भारतीय क्रिकेट का भविष्य कहा जाता था, एक बार फिर गलत वजह से सुर्खियों में हैं। गहुंजे के एमसीए स्टेडियम में मुंबई और महाराष्ट्र के बीच अभ्यास मैच के दौरान शॉ ने अपना आपा खो दिया। उन्होंने पहले शानदार 181 रन की पारी खेली और सबको अपने बल्ले से प्रभावित किया। लेकिन जैसे ही वह आउट हुए, मैदान का माहौल बदल गया। कैमरों में शॉ को मुंबई के एक खिलाड़ी पर बल्ला उठाते हुए देखा गया। साथी खिलाड़ियों और अंपायरों ने उन्हें रोका, लेकिन विवाद ने मैच की चमक फीकी कर दी।
मामला तब शुरू हुआ जब युवा गेंदबाज़ मुशीर (सरफराज खान के छोटे भाई) की गेंद पर शॉ आउट हुए। शॉ ने स्लॉग खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद का ऊपरी किनारा निकल गया और डीप स्क्वायर लेग पर कैच हो गया। मुंबई के खिलाड़ियों ने खुशी मनाई लेकिन तभी शॉ गुस्से में पलट पड़े। वह अचानक अपने पुराने साथियों की ओर मुड़े और बल्ला उठाकर मारने की कोशिश की। यह नजारा कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।
सिद्धेश लाड संग तीखी बहस
रिपोर्टों के अनुसार, शॉ और उनके पूर्व साथी सिद्धेश लाड के बीच भी बहस हुई। दोनों के बीच तीखी जुबानी लड़ाई हुई जिसे अंपायर और साथी खिलाड़ियों ने शांत कराया। यह मैच शॉ का महाराष्ट्र की ओर से मुंबई के खिलाफ पहला मुकाबला था। पहले से ही उम्मीद थी कि माहौल थोड़ा गर्म रहेगा, लेकिन इतनी बड़ी झड़प की कल्पना किसी ने नहीं की थी। उनकी पारी तो शानदार रही लेकिन यह विवाद उनकी मेहनत पर भारी पड़ गया।
करियर में नया विवाद जुड़ा
यह घटना शॉ के करियर में जुड़ी विवादों की लंबी लिस्ट में एक और नाम जोड़ देती है। भले ही वह घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बना रहे हों, लेकिन चोटें, अनुशासन की समस्याएं और मैदान से बाहर के विवाद उनकी राह में रुकावट बने हुए हैं। भारतीय टीम से उन्हें लंबे समय से बाहर रखा गया है और आईपीएल में भी उनकी जगह पक्की नहीं है। फैन्स उम्मीद कर रहे थे कि महाराष्ट्र की ओर से खेलना उनके लिए नई शुरुआत होगी, लेकिन यह विवाद फिर उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
फैन्स बंटे शॉ के बर्ताव पर
सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो छा गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि इतनी लंबी पारी के बाद आउट होने पर कोई भी खिलाड़ी निराश हो सकता है। लेकिन दूसरी ओर कई फैन्स और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मैदान पर ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। शॉ अंडर-19 विश्व कप में भारत के कप्तान रह चुके हैं और उनसे एक रोल मॉडल की तरह बर्ताव की उम्मीद की जाती है। क्रिकेट सिर्फ प्रतिभा से नहीं, बल्कि अनुशासन और धैर्य से भी बनता है।
पुरानी टीम संग भावनात्मक टकराव
मुंबई टीम के लिए भी यह पल भावनात्मक था क्योंकि शॉ कभी उनके सबसे बड़े सितारे हुआ करते थे। अब वह विरोधी टीम की ओर से खेल रहे थे और पुराने साथियों के खिलाफ पहली बार उतरे थे। मुशीर भी आक्रामक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, और ऐसे में टकराव होना आसान था। लेकिन लोग मानते हैं कि शॉ जैसे खिलाड़ी से उम्मीद रहती है कि वह उदाहरण पेश करें। उनकी यह हरकत एक बड़ी पारी के बाद भी उन्हें आलोचनाओं के घेरे में ले आई।
अनुशासन की कमी बड़ी चुनौती
आगे की राह शॉ के लिए आसान नहीं है। उनकी बल्लेबाज़ी पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन गुस्सा और अनुशासनहीनता उनकी सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है। सिलेक्टर्स और कोच लगातार यही कहते आए हैं कि शॉ को अपने स्वभाव पर काबू पाना होगा। इस मैच की शानदार पारी को लोग याद करते, लेकिन अब चर्चा सिर्फ झगड़े की हो रही है। अगर शॉ को भारतीय टीम में वापसी करनी है तो उन्हें समझना होगा कि क्रिकेट सिर्फ रन बनाने से नहीं बल्कि चरित्र से भी खेला जाता है।























