पंजाब न्यूज. पंजाब सरकार की नई औद्योगिक नीतियों ने राज्य को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में अब तक ₹86,541 करोड़ का निवेश आया है जिससे 4 लाख से ज्यादा नौकरियाँ बनी हैं। खासकर टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र में भारी निवेश हुआ है जिसने पंजाब को हरित क्रांति के बाद औद्योगिक क्रांति का चेहरा बना दिया है। अब पंजाब खेती से आगे निकलकर उद्योग का नया गढ़ बन रहा है।
फतेहगढ़ साहिब बना नया केंद्र
फतेहगढ़ साहिब जिले के वजीराबाद में बन रहा सनाथन पॉलीकॉट का ₹1,600 करोड़ का टेक्सटाइल हब पंजाब की औद्योगिक तस्वीर बदल रहा है। इस केंद्र को ‘भारत का नया मैनचेस्टर’ कहा जा रहा है। यहाँ पर आधुनिक तकनीक से यार्न और पॉलीस्टर उत्पाद बनाए जा रहे हैं जिनका उपयोग ऑटोमोबाइल, कृषि और चिकित्सा क्षेत्रों में होगा। इससे न सिर्फ रोजगार बल्कि पंजाब को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
तेजी से हो रहा निर्माण कार्य
सनाथन टेक्सटाइल्स का पहला चरण अगस्त 2025 में चालू हो चुका है और फिलहाल 350 टन प्रतिदिन उत्पादन कर रहा है। अगले साल तक यह क्षमता दोगुनी होकर 700 टन प्रतिदिन हो जाएगी। मार्च 2026 तक इसका पूरा संचालन शुरू हो जाएगा और 2027 तक इसका दूसरा चरण भी पूरा हो जाएगा। उस समय तक इसकी सालाना क्षमता 6 लाख टन तक पहुँच जाएगी। यह दिखाता है कि उद्योग किस गति से आगे बढ़ रहा है।
सरकारी नीतियों ने दिलाई रफ्तार
निवेशकों के लिए पंजाब सरकार ने एकल खिड़की प्रणाली शुरू की है जिसमें शुरुआती मंजूरी 3 दिन और सभी अनुमोदन 45 दिन में मिल जाते हैं। अगर समय सीमा में देरी होती है तो स्वीकृति अपने आप मिल जाती है। साथ ही SGST की वापसी, ब्याज दर में छूट, स्टांप ड्यूटी माफी और भूमि आवंटन में प्राथमिकता जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे छोटे-बड़े सभी निवेशकों के लिए पंजाब सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है।
लुधियाना और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स
फतेहगढ़ साहिब के अलावा लुधियाना में भी बड़े स्तर पर निवेश हुआ है। शिवा टेक्सफैब्स ने ₹815 करोड़ का निवेश किया है जबकि वर्धमान टेक्सटाइल्स और मोंटे कार्लो जैसी नामी कंपनियाँ यहाँ सक्रिय हैं। इन परियोजनाओं से पंजाब 2030 तक वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में 350 बिलियन डॉलर के हिस्से पर दावा करने की तैयारी कर रहा है। यह उत्पादन न केवल देश की मांग पूरी करेगा बल्कि निर्यात में भी अहम योगदान देगा।
गांवों और युवाओं को सीधा फायदा
नए कारखानों और हब्स ने स्थानीय युवाओं के लिए तकनीशियन, मशीन ऑपरेटर, ट्रांसपोर्ट वर्कर और कई अन्य क्षेत्रों में नौकरियाँ उपलब्ध कराई हैं। इससे गाँवों और कस्बों की अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिला है। दुकानदारों, ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने और छोटे कारोबारियों की कमाई भी बढ़ी है। इस तरह यह निवेश केवल उद्योग तक सीमित नहीं बल्कि ग्रामीण खुशहाली का आधार बन रहा है।
पंजाब की नई पहचान बनी टेक्सटाइल
यह टेक्सटाइल हब सिर्फ कपड़े बनाने का केंद्र नहीं बल्कि पंजाब के सामाजिक और आर्थिक विकास का प्रतीक बन चुका है। सनाथन टेक्सटाइल्स का IPO भी बेहद सफल रहा जिसने 4,077 करोड़ की कमाई दर्ज की। जर्मनी और जापान जैसे देशों की नजर अब पंजाब पर है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में 1.25 लाख करोड़ का कुल निवेश आकर्षित किया जाए। यह हर पंजाबी के सपनों को साकार करने का रास्ता है। ✅























