पंजाब सरकार ने कहा कि राज्य की बेटियों ने दुनिया में भारत का नाम ऊँचा किया। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम ने जिस हिम्मत से खेल दिखाया, उसने नए इतिहास को जन्म दिया। अमनजोत और हरलीन ने अपने खेल से यह साबित किया कि पंजाब की धरती हमेशा प्रतिभा और जुनून पैदा करती है। सरकार का कहना है कि यह सम्मान सिर्फ इन तीनों खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों के लिए है जो खेल के मैदान में अपने सपने पूरा करना चाहती हैं। यह फैसला युवाओं को हौसला देने वाला माना जा रहा है।
1.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार क्यों?
खेल नीति के अनुसार, राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय जीत पर खिलाड़ियों को सम्मान राशि देती है। इस बार भी उसी नीति के तहत तीनों खिलाड़ियों को 1.5-1.5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार चाहती है कि खिलाड़ी आर्थिक तौर पर भी मजबूत हों, ताकि वे बिना किसी तनाव के आगे खेल सकें। यह कदम उन माता-पिता के लिए भी प्रेरणा है जो बेटियों को खेल में आगे बढ़ाने से डरते हैं। पैसा और समर्थन मिलना खिलाड़ी के मनोबल को सीधा बढ़ाता है। इसीलिए यह पुरस्कार खास है।
हरमनप्रीत को प्रमोशन की तैयारी कैसे?
हरमनप्रीत कौर पहले से सरकारी पद पर काम कर रही हैं। सरकार अब उन्हें प्रमोशन देने का विचार कर रही है। यह प्रमोशन उनके प्रदर्शन और देश के लिए किए योगदान को देखते हुए होगा। सरकार का कहना है कि मेहनत और उपलब्धि का सम्मान होना चाहिए। हरमनप्रीत की कप्तानी ने भारत को कई बड़े मुकाबलों में जीत दिलाई, इसलिए राज्य उनका कद बढ़ाना चाहता है। यह कदम भी बेटियों को बड़े सपने देखने की हिम्मत देता है। लोग इसे बेहद सकारात्मक कदम बता रहे हैं।
अमनजोत और हरलीन को नौकरी की पेशकश क्यों?
दोनों खिलाड़ी अमनजोत और हरलीन पंजाब वापस लौट चुकी हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि दोनों को राज्य में सरकारी नौकरी की पेशकश की जा सकती है। इससे उन्हें स्थिर भविष्य मिलेगा और खेल जारी रखने में आसानी होगी। नौकरी मिलने से खिलाड़ी को सामाजिक सुरक्षा भी मिलती है। यह कदम दिखाता है कि सरकार खिलाड़ी को सिर्फ जीत के समय नहीं, बल्कि जीवनभर साथ देना चाहती है। यह संदेश बहुत मजबूत है कि प्रतिभा को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। यह नौजवानों के लिए उम्मीद का दरवाजा है।
मुख्यमंत्री की खिलाड़ियों से trực बातचीत का मतलब क्या?
विश्व कप जीतने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीनों खिलाड़ियों से वीडियो कॉल पर बात की थी। उन्होंने उनसे कहा था कि पंजाब को उनकी जीत पर गर्व है। मान सरकार ने वादा किया था कि ट्रॉफी पंजाब लाई जाएगी और सरकार खिलाड़ियों के साथ हर कदम पर खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल सिर्फ मैदान की जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज का आत्मविश्वास होता है। खिलाड़ियों ने भी कहा कि राज्य के समर्थन से ही वे आगे और अच्छा कर पाईं। यह बातचीत दोनों तरफ विश्वास का पुल बन गई।
पंजाब खेल में क्यों आगे जाना चाहता है?
राज्य सरकार खेल को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य का रास्ता मानती है। सरकार की योजना है कि गांव-गांव में खेल मैदान, कोचिंग और सुविधाएँ बढ़ाई जाएँ। इससे बच्चे गलत रास्ते से बचकर खेल में करियर बना सकेंगे। पंजाब पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दे चुका है। अब सरकार चाहती है कि यह सिलसिला और तेज हो। इस सम्मान से संदेश साफ है कि मेहनत बेकार नहीं जाती। राज्य अब खेल को नई पहचान देने की तैयारी में है।
खुद पर गर्व करने का समय
इन फैसलों ने पंजाब में खुशी और गर्व का माहौल बनाया है। परिवार, खिलाड़ी और कोच सभी इस सम्मान को दिल से महसूस कर रहे हैं। पंजाब की बेटियों ने यह साबित किया है कि सपने किसी शहर या घर की दीवारों में नहीं बंधते। मेहनत और विश्वास साथ हो तो दुनिया भी झुक सकती है। यह जीत सिर्फ क्रिकेट की नहीं, सोच की जीत है। अब पूरे पंजाब की आवाज़ है — “बेटियां बोझ नहीं, गौरव हैं।”























