पंजाब सरकार ने ज़ीरा की विवादित डिस्टलरी पर स्थायी ताला लगाने का जो फैसला लिया है, उसने पूरे राज्य में साफ संदेश दे दिया है कि अब लोगों की सेहत सबसे ऊपर है। सरकार ने माना कि यह फैक्ट्री सालों से वातावरण को खराब कर रही थी। हवा, पानी और मिट्टी लगातार इस प्रदूषण की मार झेल रहे थे। स्थानीय लोग लंबे समय से परेशानी में थे और शिकायतें भी लगातार बढ़ रही थीं। सरकार ने अब ये साफ कर दिया है कि कोई भी उद्योग जनता की सांसों से बड़ा नहीं हो सकता। इसी सोच के साथ यह कार्रवाई पूरे राज्य के लिए मिसाल बन गई है।
2️⃣ क्या NGT में सरकार का हलफनामा पूरी तस्वीर दिखाता है?
पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में जो हलफनामा दिया, उसमें साफ कहा कि यह डिस्टलरी लगातार नियम तोड़ती रही है। इसे बार-बार चेतावनी दी गई, लेकिन हालात नहीं बदले। इस दस्तावेज़ में बताया गया कि फैक्ट्री का रिकॉर्ड बेहद खराब है। पर्यावरण विभाग ने यह भी कहा कि इतने बड़े उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार ने ये भी माना कि प्रदूषण सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी की बीमारी बन चुका था। इसलिए मुख्यमंत्री ने फैसला किया कि अब कोई नरमी नहीं दिखाई जाएगी। जनता की सुरक्षा सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
3️⃣ क्या फैक्ट्री मालिकों की दलीलें जनता के स्वास्थ्य से बड़ी थीं?
पिछली सुनवाई में फैक्ट्री मालिकों ने सिर्फ इथेनॉल प्लांट चलाने की गुज़ारिश की थी, पर सरकार ने इसे सख्त तरीके से ठुकरा दिया। कारण यह था कि पूरे प्लांट का रिकॉर्ड ही संदिग्ध था। सरकार ने कहा कि जिस जगह से लोगों को इतना नुकसान हुआ है, वहां दोबारा कोई गतिविधि शुरू नहीं हो सकती। यह निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि इथेनॉल और डिस्टलरी दोनों का अंतिम उत्पाद समान है। इससे वही खतरे दोबारा पैदा हो सकते थे। सरकार ने साफ किया कि इस उद्योग को जारी रखना कानून और लोगों के अधिकार दोनों के खिलाफ होता। इसलिए बंदी ही सही रास्ता था।
4️⃣ क्या ‘पॉल्यूटर पेज़’ सिद्धांत अब पंजाब में सख्ती से लागू होगा?
सरकार ने इस केस में ‘पॉल्यूटर पेज़’ सिद्धांत लागू करने की भी मांग की। इसका मतलब है कि जिसने प्रदूषण फैलाया, वही सफाई का खर्च भी भरेगा। सरकार चाहती है कि ज़ीरा के वातावरण को पूरी तरह ठीक किया जाए। यह साफ बताया गया कि यह खर्च जनता की जेब से नहीं जाएगा। पर्यावरण की मरम्मत और नुकसान की भरपाई फैक्ट्री मालिक से ही वसूली जाएगी। इस सिद्धांत को पहली बार इतनी कड़ाई से लागू होते देख लोग इसे बड़ी जीत मान रहे हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अब पंजाब में कोई भी प्रदूषण करने वाला बच नहीं पाएगा।
5️⃣ क्या यह फैसला ज़ीरा के संघर्षरत लोगों की जीत है?
ज़ीरा में कई सालों से लोग इस प्रोजेक्ट के खिलाफ लड़ रहे थे। ज़ीरा सांझा मोर्चा और पब्लिक एक्शन कमेटी जैसे समूह लगातार आवाज उठा रहे थे। यह फैसला उन्हीं की मेहनत का नतीजा है। PAC ने भी कहा कि पहली बार सरकार ने खुलकर माना है कि प्रदूषण हो रहा था। यह मान्यता किसी भी संघर्षरत समूह के लिए बहुत बड़ी बात होती है। इससे लोगों का भरोसा भी सरकार पर बढ़ा है। जनता ने दिखा दिया कि जब आवाज मजबूत और सच्ची हो, तो बदलाव जरूर आता है। सरकार ने भी लोगों की इस भावना को सम्मान दिया।
6️⃣ क्या यह फैसला पंजाब के भविष्य की दिशा बदल सकता है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह बता दिया कि अब पंजाब का विकास सच्चे और साफ रास्ते पर चलेगा। उद्योग आएंगे, पर पर्यावरण की कीमत पर नहीं। सरकार ने यह साबित किया कि अगर प्रशासन चाह ले, तो बड़े से बड़ा उद्योग भी नियमों से ऊपर नहीं हो सकता। यह फैसला पूरे पंजाब के लिए एक संदेश है कि आने वाले सालों में सिर्फ वही उद्योग टिकेंगे जो नियम मानेंगे। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा भी करेगा। इससे राज्य में पर्यावरण को लेकर नई जागरूकता पैदा होगी।
7️⃣ क्या आने वाली सुनवाई पंजाब के इस रुख को और मजबूत करेगी?
इस मामले की अंतिम सुनवाई 24 नवंबर को होनी है। लोगों को उम्मीद है कि NGT भी सरकार के इस कड़े रुख का समर्थन करेगी। यह सुनवाई पंजाब के पर्यावरण भविष्य का नया अध्याय तय कर सकती है। अगर यह फैसला कायम रहता है, तो राज्य में उद्योगों के लिए साफ नियम तय हो जाएंगे। जनता को भी भरोसा मिलेगा कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। सरकार पहले ही कह चुकी है कि ज़ीरो टॉलरेंस ही आगे का रास्ता है। ऐसे में यह मामला पंजाब की नई पर्यावरण नीति की नींव को और मजबूत कर देगा।























