पंजाब सरकार ने इस साल धान खरीद में इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य ने 150 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा। यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली जब कई हिस्सों में बाढ़ ने फसलें नुकसान पहुंचाई थीं। इसके बावजूद सरकार ने मंडियों में मजबूत इंतज़ाम किए। किसानों की परेशानियों को पहले ही ध्यान में रखा गया। नतीजा यह हुआ कि हर किसान बिना रुकावट अपनी फसल बेच सका। यह रिकॉर्ड सरकार और किसानों की संयुक्त मेहनत का परिणाम है।
किसानों को तुरंत भुगतान कैसे मिला?
सरकार ने भुगतान प्रणाली को पहले से तेज़ बनाया। किसानों को MSP का पैसा सीधे बैंक खातों में भेजा गया। अब तक 11 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिल चुका है। 48 घंटे के भीतर भुगतान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। ज्यादातर जगहों पर यह समय से पहले पूरा हुआ। किसानों को किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़े। पैसों की समय पर प्राप्ति ने अगली फसल की तैयारी आसान कर दी। इससे किसानों का सरकार पर भरोसा और मजबूत हुआ।
मंडियों की नई व्यवस्था ने क्या बदला?
इस बार मंडियों में तकनीक का बड़ा उपयोग किया गया। रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से खरीद प्रक्रिया तेज़ हुई। अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारियाँ दी गईं। धान की आवक का हिसाब तुरंत अपडेट किया जाता रहा। इससे लाइनें नहीं लगीं और किसानों को इंतज़ार नहीं करना पड़ा। मंडियों की भीड़ को बेहतर तरीके से संभाला गया। धान का लगभग 99% बिना देरी खरीदा गया। यह व्यवस्था अगले सीजन के लिए भी मिसाल बन गई।
किसान-प्रथम नीति क्यों सफल हुई?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा कि किसान राज्य की रीढ़ हैं। सरकार ने सिस्टम को किसानों के अनुकूल बनाया। लक्ष्य सिर्फ़ धान खरीदना नहीं, बल्कि किसान के सम्मान को बढ़ाना था। अधिकारियों को ईमानदारी और समयबद्ध काम का आदेश दिया गया। हर स्तर पर कड़ाई रखी गई। किसानों की शिकायतें तुरंत सुनी गईं। सरकार की नीयत और नीति दोनों साफ दिखीं। इसी वजह से यह सीजन कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
बाढ़ के बीच यह सफलता कैसे मिली?
बाढ़ के कारण कई इलाकों में किसानों को भारी नुकसान हुआ था। खेतों में पानी भर गया था। कई जगह फसल खराब हो गई थी। इसके बावजूद सरकार ने बची फसल की खरीद सुनिश्चित की। विशेष टीमें बनाई गई थीं। प्रभावित इलाकों को प्राथमिकता दी गई। मंडियों तक पहुंच को आसान बनाया गया। किसानों की राहत के लिए प्रशासन लगातार सक्रिय रहा। इसी वजह से मुश्किल हालात के बावजूद राज्य रिकॉर्ड बना सका।
₹34,000 करोड़ का भुगतान क्यों खास है?
इतनी बड़ी राशि सीधे किसानों के खातों में जाना अभूतपूर्व है। इस धनराशि ने किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की। कर्ज लेने की जरूरत कम हो गई। बाजार में भी स्थिरता आई। किसान बिना तनाव के अगली फसल की ओर बढ़ सके। भुगतान बिल्कुल समय पर हुआ। इससे किसान राज्य सरकार के फैसलों से खुश हैं। वे कहते हैं कि पहली बार सिस्टम इतनी साफ और तेज़ दिखा है।
इस रिकॉर्ड का पंजाब पर क्या असर पड़ेगा?
यह रिकॉर्ड पंजाब के कृषि भविष्य को नई दिशा देगा। किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। सरकार की छवि मजबूत हुई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। मंडियों में व्यवस्था सुधार आगे भी जारी रहेगा। युवाओं का रुझान खेती की ओर बढ़ेगा। पंजाब फिर से कृषि में अग्रणी राज्य बनने की ओर बढ़ चुका है। यह सीजन आने वाले वर्षों की नींव बनकर उभरा है।























