पंजाब में आवारा पशुओं की समस्या कई सालों से बढ़ती जा रही है और लोगों को सड़क हादसों से लेकर खेती-बाड़ी तक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारों ने पहले भी कोशिशें कीं, लेकिन कोई स्थायी हल सामने नहीं आया। गांव और शहर दोनों में गाय-बैल खुले घूमते रहे। कई बार हादसे इतने गंभीर हुए कि जान तक चली गई। इस स्थिति ने लोगों में डर और नाराज़गी दोनों बढ़ाई। इसलिए पंजाब सरकार ने इस बार ऐसा कदम उठाया है जिसे अब तक सबसे बड़ा और सख़्त माना जा रहा है।
क्या है नई कार्ययोजना
इस बार पंजाब सरकार ने पहली बार एक संयुक्त राज्य-स्तरीय कार्ययोजना लागू की है जिसमें हर विभाग को एक-दूसरे से जोड़कर काम करने का आदेश दिया गया है। यह योजना आवारा पशुओं को सिर्फ सड़कों से हटाने तक सीमित नहीं है बल्कि उनकी सुरक्षित देखभाल भी शामिल है। “Prevention of Cruelty to Animals Act” में किए बदलावों को नीति का आधार बनाया गया है। सरकार चाहती है कि आने वाले महीनों में पूरे राज्य की सड़कों से पशु पूरी तरह हट जाएं। इस योजना की खास बात यह है कि हर जिले को अपना अलग लक्ष्य दिया गया है। इससे काम में तेज़ी आने की उम्मीद है।
मंत्री का बड़ा बयान
स्थानीय सरकार विभाग के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने विधानसभा में बताया कि यह बहु-एजेंसी योजना पहले से कहीं अधिक सख़्त और लागू करने योग्य है। सभी संबंधित विभागों को रोजाना रिपोर्ट देनी होगी ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार ने “Punjab Compensation to Victims of Animal Attacks and Accidents Policy, 2023” पहले ही लागू कर दी है। इसके तहत किसी पर हमला होने या किसी हादसे पर तुरंत आर्थिक मदद दी जाएगी। इस नीति से लोगों में भरोसा बढ़ा है कि सरकार स्थिति को गंभीरता से ले रही है। मंत्री ने साफ कहा कि यह अभियान दिखावा नहीं बल्कि असली सुधार है।
गौशालाओं की बड़ी भूमिका
राज्य में इस समय 518 पंजीकृत गौशालाओं में दो लाख से ज्यादा पशुओं को आश्रय दिया जा रहा है और सरकार इन्हें लगातार आर्थिक मदद भी दे रही है। Cow Cess फंड के ज़रिए गौशालाओं को और मज़बूत बनाया जा रहा है ताकि उन्हें खाने-पीने और दवाइयों की कोई कमी न हो। ग्रामीण विकास विभाग ने 20 सरकारी पाउंड में 77 नए पशु-शेड बनाए हैं। शहरी निकायों ने भी 10 नए आश्रय स्थल तैयार किए हैं। इन सब प्रयासों का लक्ष्य है कि कोई भी पशु सड़क पर भटकने न पाए। पंजाब सरकार मानती है कि सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं आश्रयों की है।
जिला स्तर पर कड़ी निगरानी
हर जिले में डिप्टी कमिश्नर को सीधी जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें 31 मार्च तक लक्ष्य पूरा करने का आदेश मिला है। हर जिले के लिए लगभग 150 आवारा पशुओं को गौशालाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य तय हुआ है। शिकायतों के लिए 24 घंटे काम करने वाली हेल्पलाइन 9646-222-555 भी सक्रिय की गई है। किसी भी हमले, दुर्घटना या खतरे की सूचना मिलते ही टीमें मौके पर पहुंचेंगी। बजट और भुगतान की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है ताकि कोई काम रुके नहीं। इस निगरानी से उम्मीद है कि अभियान में तेजी आएगी और लोगों को राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री खुद संभाल रहे मोर्चा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस अभियान को अपनी सीधी निगरानी में रखा है और सभी अधिकारियों को नियमित निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यह अभियान सिर्फ सफाई या पकड़-धकड़ नहीं बल्कि एक मानवीय मिशन है। उनका लक्ष्य है कि पंजाब में कोई भी व्यक्ति या किसान आवारा पशुओं के डर में न रहे। वह लगातार जिलों के काम की रिपोर्ट ले रहे हैं ताकि कहीं कोई देरी न हो। यह भी कहा जा रहा है कि अगर यह मॉडल सफल हुआ, तो दूसरे राज्य भी इसे अपनाएंगे। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि पंजाब की सड़कों का पूरा माहौल बदले।
क्या मिलेगा जनता को लाभ
अगर यह अभियान सफल रहा तो सड़क हादसों में बड़ी कमी आएगी और किसानों की फसलें सुरक्षित रहेंगी। गांव-कस्बों में भी लोगों को राहत मिलेगी क्योंकि रात-रात भर जागकर फसल बचाने की चिंता खत्म हो सकती है। सरकार का दावा है कि यह सिर्फ अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान की शुरुआत है। इससे पशु-कल्याण भी बेहतर होगा और सड़क सुरक्षा भी मजबूत होगी। गरीब परिवारों को मुआवज़ा नीति से भी बड़ा सहारा मिलेगा। कुल मिलाकर यह कदम दिखाता है कि राजनीतिक इच्छा और सख़्त योजना के साथ बड़ी समस्याएं भी हल की जा सकती हैं। पंजाब अब बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम रख चुका है।























