गुवाहाटी टेस्ट के तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज़ मार्को जेनसन ने भारतीय टीम की बल्लेबाज़ी लाइनअप को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने केवल 48 रन देकर 6 विकेट झटके और भारत को 201 रनों पर ढेर कर दिया। उनकी घातक गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए। इस प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 288 रनों की बड़ी बढ़त बना ली। यह बढ़त मैच के निर्णायक मोड़ के रूप में देखी जा रही है। उनके स्पैल ने दर्शकों में भी उत्साह बढ़ाया।
क्या बल्लेबाज संभल नहीं पाए?
भारतीय पिचें सामान्यतः स्पिनरों के लिए मददगार मानी जाती हैं, लेकिन जेनसन ने अपनी तेज गति और उछाल से बल्लेबाज़ों को चौंका दिया। 6 फुट 8 इंच लंबे इस गेंदबाज़ ने बाउंसर पर खासा नियंत्रण दिखाया। उन्होंने ध्रुव जुरेल, ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, नितीश रेड्डी, कुलदीप यादव और जसप्रीत बुमराह को आउट किया। उनकी पांच बाउंसर पर मिली सफलताएं दर्शाती हैं कि तेज गेंदबाजी उनकी असली ताकत है। भारतीय बल्लेबाज़ समझ नहीं पाए कि गेंद कहां से आएगी।
क्या बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड?
मार्को जेनसन ने भारत के खिलाफ छह विकेट लेते हुए अपने टेस्ट करियर का चौथा पांच विकेट हॉल दर्ज किया। यह भारतीय सरजमीं पर उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन रहा। वह भारतीय धरती पर भारत के खिलाफ पचास से अधिक रन और पांच विकेट लेने वाले पहले दक्षिण अफ्रीकी बाएं हाथ के तेज गेंदबाज़ बन गए। इससे पहले दुनिया में केवल तीन खिलाड़ी ही ऐसा कर पाए हैं। आखिरी बार यह कारनामा 1976 में इंग्लैंड के जॉन लीवर ने किया था।
25 साल बाद दोहरा कारनामा?
यह पहली बार है पिछले 25 सालों में जब किसी दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी ने भारत में पांच विकेट के साथ पचास रन भी बनाए। इस उपलब्धि को जेनसन से पहले केवल निक्की बोजे ने 2000 में किया था। जेनसन का प्रदर्शन इस मैच में ऑलराउंड क्षमता का प्रमाण रहा। उन्होंने बल्ले से भी भारतीय गेंदबाजों को परेशान किया। उनके योगदान के कारण मैच दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में झुक गया। क्रिकेट विशेषज्ञ इसे आधुनिक युग का बेहतरीन प्रदर्शन मान रहे हैं।
भारत फॉलो-ऑन से क्यों बचा?
हालांकि दक्षिण अफ्रीका को 288 रनों की विशाल बढ़त मिली, फिर भी उन्होंने भारत को फॉलो-ऑन नहीं दिया। यह भारतीय टेस्ट इतिहास में पहली बार हुआ जब इतनी बड़ी बढ़त के बावजूद विपक्षी टीम ने फॉलो-ऑन से परहेज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका पिच की स्थिति को देखकर निर्णय लेना चाहता था। शायद उन्हें मौसम और गेंद स्थिति की चिंता रही। दर्शकों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा रही।
बाउंसर से क्यों मचाई तबाही?
जेनसन की गेंदों में ऊंचाई और गति का संयोजन देखने को मिला। उनकी बाउंसर ने भारतीय बल्लेबाज़ों को जकड़ लिया और ज्यादातर शॉट नियंत्रण से बाहर हुए। बल्लेबाज़ों को रन बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। उनकी लाइन और लेंथ इतनी प्रभावी रही कि बल्लेबाज खेलने के लिए मजबूर हुए। यह स्पैल भारत के खिलाफ भविष्य की रणनीति बदल सकता है। मैदान पर दर्शकों ने उनकी हर गेंद पर प्रतिक्रिया दी।
क्या मैच में मोड़ आया?
भारतीय टीम की 201 पर समाप्ति के बाद दक्षिण अफ्रीका ने मजबूत स्थिति हासिल कर ली। जेनसन के स्पैल ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया और भारतीय टीम दबाव में आ गई। यह प्रदर्शन न केवल रिकॉर्ड के लिहाज से अहम रहा बल्कि मानसिक रूप से भी भारतीय खिलाड़ियों को प्रभावित करता दिखा। अब भारत को वापसी के लिए विशेष प्रयास की जरूरत होगी। क्रिकेट विश्लेषक जेनसन की इस गेंदबाजी को मैच टर्निंग पॉइंट बता रहे हैं।

























