बजट 2026 ऐसे समय आ रहा है जब भारत का सेमीकंडक्टर सपना चर्चा में है। सरकार ने बीते वर्षों में मिशन लॉन्च किया। कई परियोजनाओं को मंजूरी भी मिली। अब बात जमीन पर काम की है। क्या फाइलों से फैसले बाहर आएंगे। क्या फैक्ट्रियों की रफ्तार तेज होगी। दुनिया के बड़े देश भारत की ओर देख रहे हैं। यह बजट भरोसे की कसौटी बन सकता है।
सरकार का लक्ष्य कितना बड़ा है?
केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw बार-बार कह चुके हैं कि भारत 2032 तक टॉप सेमीकंडक्टर देशों में होगा। यह लक्ष्य सुनने में बड़ा लगता है। लेकिन भारत की बाजार ताकत भी बड़ी है। सरकार का दावा है कि 2026 से उत्पादन शुरू होगा। चार कंपनियों की बात कही गई है। भरोसा तभी बनेगा जब समयसीमा निभेगी। देरी हुई तो सवाल खड़े होंगे।
कौन सी कंपनियां दांव लगा रहीं?
भारत में चिप सेक्टर में बड़े नाम सामने आए हैं। Micron Technology गुजरात में यूनिट लगा रही है। टाटा समूह ताइवान की कंपनी PSMC के साथ प्लांट बना रहा है। केन्स और सीजी सेमी भी कतार में हैं। यह भरोसे का संकेत है। विदेशी कंपनियां भारत को हल्के में नहीं ले रहीं। अब सरकार को भरोसा कायम रखना है।
निवेश का असली आकार क्या है?
गुजरात में माइक्रोन की परियोजना पर 22,500 करोड़ से ज्यादा खर्च है। धोलेरा में टाटा-PSMC प्लांट पर करीब 91,000 करोड़ रुपये लगेंगे। अन्य राज्यों में भी योजनाएं हैं। असम यूपी ओडिशा पंजाब के नाम सामने आए हैं। कुल निवेश ऐतिहासिक है। लेकिन देरी महंगी पड़ सकती है। समय पर काम पूरा होना सबसे जरूरी है।
क्या सब्सिडी ही सबसे बड़ा सहारा?
सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाना आसान नहीं है। इसमें अरबों डॉलर खर्च होते हैं। बिजली और पानी से काम नहीं चलता। इंडस्ट्री मानती है कि सीधी कैपिटल सब्सिडी जरूरी है। शुरुआती जोखिम सरकार को बांटना होगा। वरना कंपनियां दूसरे देशों का रुख करेंगी। डिजाइन स्टार्टअप्स को भी मदद चाहिए। भारत की असली ताकत यही टैलेंट है।
इंफ्रास्ट्रक्चर कितना तैयार है?
आज भी कई राज्यों में ढांचा कमजोर है। जमीन अधिग्रहण समय लेता है। बिजली और पानी की स्थिरता जरूरी है। लॉजिस्टिक्स भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि क्लस्टर मॉडल बनाना होगा। जहां सप्लाई चेन पास-पास हो। केंद्र और राज्यों की तालमेल अहम है। बिना ढांचे के सपना अधूरा रहेगा।
क्या बजट उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
बजट 2026 सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। यह सरकार की नीयत दिखाएगा। इंसेंटिव जारी रहेंगे या नहीं। स्किल ट्रेनिंग पर कितना जोर होगा। यूनिवर्सिटी और इंडस्ट्री साथ आएंगी या नहीं। दुनिया भारत को परखेगी। यह मौका इतिहास बना सकता है। चूक हुई तो दौड़ में पिछड़ना तय है।
























