Business News: इस साल अक्टूबर का महीना सरकार के लिए खुशखबरी लेकर आया। जीएसटी कलेक्शन 1,95,936 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले महीने की तुलना में करीब 4.6 प्रतिशत ज्यादा है। सितंबर में यह आंकड़ा 1,87,346 करोड़ रुपये था। इस बढ़त का मुख्य कारण त्योहारों के मौसम में बढ़ी खपत, बेहतर कर अनुपालन और जीएसटी ढांचे में किए गए हालिया सुधार बताए जा रहे हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और मजबूती का संकेत है।
कितना रहा घरेलू और आयात राजस्व?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में सकल घरेलू राजस्व में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। यह अब 1.45 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। वहीं आयात कर में 12.84 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह 50,884 करोड़ रुपये पर जा पहुंचा। जीएसटी रिफंड भी पिछले साल की तुलना में करीब 39.6 प्रतिशत बढ़कर 26,934 करोड़ रुपये हुआ है। इससे कारोबारियों को नकदी प्रवाह में राहत मिली है और बाजार में खर्च की गति और बढ़ी है।
अप्रैल से अक्टूबर तक का कुल संग्रह क्या?
सरकार के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच कुल जीएसटी संग्रह 13.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। पिछले साल की इसी अवधि में यह 12.74 लाख करोड़ रुपये था। यानी करीब 9 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि भारतीय बाजार में उपभोग की स्थिति मजबूत है और कारोबारी गतिविधियां निरंतर बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रफ्तार बरकरार रही तो साल के अंत तक रिकॉर्ड स्तर का कर संग्रह हो सकता है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा इस बढ़त पर?
केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख अभिषेक जैन के मुताबिक, जीएसटी में यह बढ़ोतरी भारत में मजबूत उपभोग और उद्योगों द्वारा नई कर प्रणाली को अपनाने की क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन और सुधारों के चलते बाजार में व्यापार का माहौल उत्साहजनक बना हुआ है। वहीं, डेलॉइट इंडिया के विशेषज्ञ महेश जयसिंह ने इसे “जीएसटी उत्सव धमाका” बताया। उन्होंने कहा कि नई दर संरचना और अनुपालन सुधारों ने सरकार के राजस्व को मजबूती दी है।
क्या बदले हैं नए जीएसटी सुधार?
सितंबर 2025 में जीएसटी परिषद ने टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया था। चार दरों की जगह अब सिर्फ दो स्लैब रखे गए — 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत। पहले 12 और 28 प्रतिशत वाले कई उत्पादों को इन दोनों श्रेणियों में मिला दिया गया है। इस फैसले से मध्यम वर्ग को राहत मिली है क्योंकि अब रोजमर्रा की चीजें सस्ती हुई हैं। इससे खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था में नई जान डाल सकती है।
किन उत्पादों को मिला छूट से अपवाद?
सरकार ने बताया कि कुछ उत्पाद जैसे पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, जर्दा और बीड़ी इस बदलाव से बाहर रखे गए हैं। इन पर पहले जैसी ही ऊंची दरें लागू रहेंगी ताकि इनके उपभोग को बढ़ावा न मिले। नई दरें 22 सितंबर से लागू हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कर संग्रह को संतुलित रखने और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
आगे क्या उम्मीदें हैं सरकार से?
वित्त मंत्रालय का मानना है कि सुधारों के बाद अगले कुछ महीनों में जीएसटी से होने वाली आय और बढ़ सकती है। मजबूत कलेक्शन सरकार को नई नीतियां लागू करने और जीएसटी 2.0 सुधारों को आगे बढ़ाने का मौका देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले बजट में कर चोरी पर नियंत्रण और तकनीकी प्रणाली को और बेहतर बनाने के कदम उठाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, अक्टूबर का प्रदर्शन बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

























