केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर अनुमान है कि इससे केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में 186 प्रतिशत की भारी वृद्धि होगी। वर्तमान में यह 18,000 रुपये है, जो 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद बढ़कर 51,480 रुपये हो सकती है।
प्रथम वेतन आयोग
प्रथम वेतन आयोग का कार्यकाल मई 1946 से मई 1947 तक था। इसके अध्यक्ष श्रीनिवास वरदाचार्य थे। वेतन आयोग के गठन का उद्देश्य स्वतंत्र सरकार के वेतन ढांचे में सुधार करना था। इसने ‘जीवन निर्वाह मजदूरी’ का सिद्धांत प्रस्तुत किया। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 55 रुपये प्रति माह और अधिकतम सीमा 2000 रुपये प्रति माह तय की गई थी। इसका लाभ 15 लाख कर्मचारियों को मिला।
दूसरा वेतन आयोग
प्रथम वेतन आयोग के 10 वर्ष बाद, अगस्त 1957 में द्वितीय वेतन आयोग का गठन किया गया। इसका कार्यकाल दो वर्ष का था। इसका नेतृत्व जगन्नाथ दास ने किया था। इस वेतन आयोग ने समाजवादी पैटर्न की अवधारणा पेश की, जिसमें समानता को एक मौलिक सिद्धांत माना गया। इसका जोर जीवन-यापन की लागत और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने पर था। इससे 80 लाख कर्मचारियों को लाभ मिला। इसने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 80 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की।
तीसरा वेतन आयोग
तीसरा वेतन आयोग अप्रैल 1970 से मार्च 1971 तक था। इसके अध्यक्ष रघुबीर दयाल थे। इसने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 185 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की। इस वेतन आयोग ने निजी-सरकारी क्षेत्र में वेतन में समानता पर जोर दिया। इसके अलावा वेतन संरचना में मौजूदा खामियों को दूर करने का भी प्रयास किया गया। 30 लाख कर्मचारियों को वेतन आयोग का लाभ मिला।
चौथा वेतन आयोग
चौथा वेतन आयोग सितम्बर 1983 में गठित किया गया था और इसका कार्यकाल दिसम्बर 1986 में समाप्त हुआ। यह वेतन सुधार की दिशा में एक कदम आगे है। वेतन आयोग ने सभी पदों पर वेतन असमानता को समाप्त करने पर जोर दिया है। इसने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 750 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की।
पांचवां वेतन आयोग
पांचवें वेतन आयोग का गठन न्यायमूर्ति एस. रत्नावेता पांडियन के नेतृत्व में किया गया था। इसका कार्यकाल अप्रैल 1994 से जनवरी 1997 तक था। पहली बार न्यूनतम वेतन चार अंकों तक पहुंच गया। इसे बढ़ाकर 2,550 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की गई। इसने वेतनमान कम करने की सिफारिश की तथा सरकारी कार्यालयों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। इससे 40 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिला।
छठा वेतन आयोग
छठे वेतन आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2006 से मार्च 2008 तक था। इसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण थे। इसमें वेतन बैंड और ग्रेड वेतन की अवधारणा पेश की गई। न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया तथा अधिकतम वेतन सीमा बढ़ाकर 80,000 रुपये प्रति माह कर दी गई। इसने प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार देने की अवधारणा शुरू की। इससे 60 लाख कर्मचारियों को लाभ मिला है।
सातवां वेतन आयोग
सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था, जिसका कार्यकाल नवंबर 2016 में समाप्त होगा। इसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.के. माथुर थे। इसमें न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया था। आयोग ने ग्रेड वेतन प्रणाली के स्थान पर वेतन मैट्रिक्स की अवधारणा शुरू की। यह लाभ के साथ काम और घर के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। इससे 1 करोड़ कर्मचारियों को लाभ मिला।

























