प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में यह बात कही। उन्होंने कहा कि 2047 भारत की आज़ादी के 100 साल पूरे होने का वर्ष होगा। तब तक भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि भारत सिर्फ विदेशी तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं रहेगा। अब लक्ष्य खुद तकनीक बनाना है। एआई को उन्होंने विकास का साधन बताया। उनका कहना था कि तैयारी आज से शुरू करनी होगी।
क्या 2047 भारत के लिए निर्णायक साल है?
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 केवल एक तारीख नहीं है। यह भारत के भविष्य की पहचान है। दुनिया में वही देश आगे बढ़ेगा जो नई तकनीक पर पकड़ रखेगा। भारत को इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहिए। इसके लिए लंबी योजना और मजबूत क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने युवाओं को तैयार रहने का संदेश दिया।
क्या एआई बदल देगा आईटी सेक्टर?
भारत का आईटी सेक्टर लंबे समय से सेवाओं पर आधारित रहा है। अब एआई इसे नए रूप में ढालेगा। प्रधानमंत्री ने अनुमान जताया कि 2030 तक आईटी उद्योग 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। एआई के कारण काम करने का तरीका बदलेगा। नए कौशल की मांग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि एआई नौकरी खत्म नहीं करता, बल्कि काम की प्रकृति बदलता है।
क्या इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है?
सरकार ने इंडिया एआई मिशन शुरू किया है। इसके तहत हजारों आधुनिक जीपीयू लगाए जा रहे हैं। पहले लक्ष्य से अधिक क्षमता हासिल की जा चुकी है। अब 20,000 और जीपीयू जोड़े जा रहे हैं। कुल संख्या 38,000 से ज्यादा होगी। जीपीयू सिर्फ 65 रुपये प्रति घंटे पर उपलब्ध हैं। यह दर वैश्विक औसत से काफी कम है।
क्या कौशल केंद्र तैयार हैं?
चार सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सस्टेनेबल शहरों पर काम कर रहे हैं। पांच राष्ट्रीय केंद्र एआई स्किलिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अगला चरण रिसर्च और डिजाइन पर केंद्रित होगा। भारत अपनी जरूरतों के अनुसार समाधान बनाना चाहता है। इस क्षेत्र में निवेश 200 अरब डॉलर पार कर सकता है।
क्या एआई में पक्षपात खतरा है?
प्रधानमंत्री ने एआई में बायस को गंभीर मुद्दा बताया। कई मॉडल अंग्रेजी और शहरी डेटा पर आधारित हैं। भारत की विविधता इससे कहीं अधिक है। ग्रामीण और क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करना जरूरी है। सीमित डेटा से गलत परिणाम आ सकते हैं। इसलिए विविध डेटा पर काम हो रहा है।
क्या भारत जिम्मेदार एआई का नेतृत्व करेगा?
भारत समावेशी और जिम्मेदार एआई पर जोर दे रहा है। क्षेत्रीय भाषाओं के मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता पर शोध बढ़ाया जा रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक विशेषज्ञ शामिल हुए। भारत सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहता है। 2047 का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन दिशा स्पष्ट है।
























