इंडिगो ने बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द की हैं। बीते दस दिनों में 4000 से अधिक फ्लाइटें नहीं उड़ सकीं। एयरपोर्ट पर भारी अफरा-तफरी दिखी। आम यात्रियों की योजनाएँ बिगड़ गईं। बिजनेस यात्राओं पर ब्रेक लग गया। देरी और कैंसिलेशन का असर दिल्ली के दैनिक एयर ट्रैफिक पर सीधे पड़ा। शहर की व्यावसायिक गतिविधियाँ धीमी हो गईं।
व्यापारी क्यों परेशान दिखाई दिए?
दिल्ली रोजाना कारोबार से कमाती है। देशभर से व्यापारी खरीदारी और ट्रेड के लिए यहाँ आते हैं। लेकिन उड़ानें रुकने से यह संख्या 25% तक गिर गई। बाजारों में फुटफॉल कम हो गया। चांदनी चौक, करोल बाग, खासपुरा और सरोजिनी नगर में बिक्री घटी। दुकानदार त्योहार और वेडिंग सीजन में नुकसान से घबराए हुए हैं। आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। व्यापार का पहिया धीमा दिख रहा है।
बड़े इवेंट्स को क्या नुकसान हुआ?
प्रगति मैदान और आनंद मंडपम में अहम प्रदर्शनियाँ चल रही थीं। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और फर्निशिंग के बड़े आयोजन थे। हजारों प्रतिभागियों के आने की उम्मीद थी। लेकिन कैंसिल हुई उड़ानों से कई लोग पहुँच ही नहीं पाए। आयोजकों ने कहा कि ऑर्डर और नेटवर्किंग पर सीधा असर हुआ। करोड़ों रुपये के संभावित कॉन्ट्रैक्ट रुक गए। इवेंट सेक्टर पर बड़ा संकट दिखा।
पर्यटन और होटलों की कमर कैसे टूटी?
क्रिसमस–न्यू ईयर के बीच दिल्ली का टूरिज्म सीजन तेज होता है। लेकिन इस बार बुकिंग्स में 35–40% गिरावट दर्ज हुई। परिवारों ने छुट्टियाँ टाल दीं। होटल रूम खाली दिखाई दिए। ट्रैवल एजेंट परेशान हैं। डाइनिंग और रेस्टोरेंट्स में ग्राहकों की कमी दिखी। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को सीधा वित्तीय झटका लगा। रिकवरी की रफ्तार धीमी पड़ गई।
दिल्ली को कितना आर्थिक नुकसान हुआ?
CTI ने एक अनुमान जारी किया। उद्योग, पर्यटन, होटल, इवेंट्स और वेडिंग सेक्टर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान बताया गया। कई डेस्टिनेशन वेडिंग्स समय पर न हो सकीं। मेहमान देर से पहुँचे या पहुँचे ही नहीं। बड़े समारोहों में परिजन तक गायब रहे। बुकिंग्स रद्द होने से नुकसान और बढ़ गया। आयोजकों का सीजन बिगड़ गया।
डीजीसीए के आंकड़े क्या कहते हैं?
DGCA के मुताबिक नवंबर में 64,346 उड़ानें तय थीं। इनमें सिर्फ 59,438 उड़ ही सकीं। करीब 4900 उड़ानें रद्द या प्रभावित हुईं। यात्रियों के भरोसे पर असर पड़ा। एयरलाइन संचालन पर सवाल उठे। सरकार ने स्थिति की निगरानी तेज की। राहत के इंतज़ार में यात्री संख्या घटती गई। यह आंकड़े उद्योग जगत को डरा रहे हैं।
क्या सुधार से स्थिति संभल सकती है?
एयरपोर्ट अथॉरिटी समाधान की कोशिश कर रही है। यात्रियों को समायोजन और वैकल्पिक उड़ानें दी जा रही हैं। लेकिन भरोसा वापसी में समय लगेगा। व्यापारियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। टूरिज्म और इवेंट इंडस्ट्री कर राहत की उम्मीद कर रहे हैं। देश की राजधानी को सामान्य स्थिति में लौटने में देर लग सकती है। सभी की नज़र अगले फैसलों पर है।

























