ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत पर भी पड़ने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट के पास करीब 37 भारतीय झंडे वाले जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों में करीब 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का सामान लदा है। इनमें कई जहाज तेल और गैस ले जाने वाले टैंकर हैं। ये जहाज आमतौर पर भारत के बंदरगाहों तक कच्चा तेल और एलपीजी पहुंचाते हैं। लेकिन युद्ध के कारण इस इलाके में सुरक्षा खतरा काफी बढ़ गया है। इसी वजह से इन जहाजों की आवाजाही रुक गई है।
शिपिंग उद्योग ने क्यों जताई चिंता
भारतीय शिपिंग उद्योग ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। इंडियन नेशनल शिपओनर्स एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखा है। इस पत्र में मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि जरूरी समुद्री रास्ता लगभग बंद हो गया है। इससे जहाजों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। उद्योग से जुड़े लोगों ने यह भी कहा कि स्थिति को लेकर भ्रम बना हुआ है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि चीनी और ईरानी जहाज अभी भी गुजर रहे हैं। इससे भारतीय ऑपरेटरों में यह सवाल उठ रहा है कि वहां से गुजरना सुरक्षित है या नहीं।
ईंधन सप्लाई पर क्यों खतरा
इस संकट का असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है। भारत का लगभग 85 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से आता है। अगर लंबे समय तक जहाज फंसे रहे तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से शिपिंग एसोसिएशन ने सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उसने यह भी कहा है कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाए। साथ ही जहाजों पर मौजूद क्रू की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
क्या जहाजों पर हमले भी हुए
युद्ध शुरू होने के बाद समुद्री क्षेत्र में खतरा और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक तीन भारतीय टैंकरों पर पहले ही हमला हो चुका है। एक जहाज मिसाइल हमले से बाल-बाल बच गया था। इन घटनाओं ने खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इस इलाके में करीब 400 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। वे तेल टैंकरों और गैस कैरियर जहाजों पर तैनात हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया भर में होने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। अनुमान है कि वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए यह रास्ता और भी महत्वपूर्ण है। भारत का करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। इसके अलावा आधे से ज्यादा एलएनजी आयात भी इसी रास्ते से होता है।
क्यों बढ़ रहा शिपिंग खर्च
इस युद्ध के कारण शिपिंग लागत भी तेजी से बढ़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा कंपनियों ने वॉर रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बीमा खर्च लगभग दोगुना हो सकता है। माल ढुलाई के रेट भी बढ़ने लगे हैं। कई शिपिंग कंपनियां नए ऑर्डर लेने से हिचकिचा रही हैं। कुछ ऑपरेटर तो इस रास्ते से गुजरने से भी बच रहे हैं। इससे समुद्री व्यापार की गति धीमी पड़ सकती है।
तेल की कीमतों में उथल-पुथल
इस युद्ध का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र से तेल सप्लाई रुकने की आशंका ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। एक समय ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। बाद में कीमतें कुछ नीचे आईं लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिकी क्रूड की कीमत भी करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेडर लगातार होर्मुज स्ट्रेट और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात के आधार पर कीमतों में और बदलाव हो सकता है।

























