बिजनेस न्यूज. हाल ही में प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट 2025-26 में, केंद्र सरकार ने 15 लाख करोड़ रुपये के बाजार उधार की योजना की घोषणा की है। इसका उद्देश्य विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण सुनिश्चित करना है। इस बढ़ते कर्ज के परिणामस्वरूप, सरकार की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ब्याज भुगतान में जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में, राजकोषीय घाटा 4.8% रहने का अनुमान है, जिसे अगले वित्त वर्ष में 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्यों को भी मिल रहा है ब्याज–मुक्त ऋण
केंद्र सरकार न केवल स्वयं कर्ज ले रही है, बल्कि राज्यों को भी 50 वर्ष के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान कर रही है, ताकि वे अपने बुनियादी ढांचे का विकास कर सकें।
आर्थिक विकास के लिए कर्ज़ का उपयोग
हालांकि, इस बढ़ते कर्ज़ के बावजूद, सरकार का मानना है कि इन निधियों का उपयोग बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा, जिससे देश की समग्र आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। केंद्र सरकार की बढ़ती कर्ज़दारी और ब्याज भुगतान में आय का बड़ा हिस्सा चिंताजनक हो सकता है, लेकिन यदि इन निधियों का सही उपयोग किया जाए, तो यह देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

























