भारत के पूर्वोत्तर में हुई एक गुप्त कार्रवाई ने अचानक पुराने बयान को फिर चर्चा में ला दिया। दो साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina ने एक विवादित दावा किया था। उस समय कई लोगों ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात बताया था। हसीना ने कहा था कि कुछ विदेशी ताकतें एक नई योजना पर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को जोड़ने की कोशिश हो सकती है। इस क्षेत्र में एक “क्रिश्चियन स्टेट” बनाने की बात उन्होंने कही थी। तब यह बयान ज्यादा चर्चा में नहीं रहा। अब हालात बदलने के साथ यह दावा फिर सुर्खियों में है।
क्यों फिर उठने लगे सवाल?
इस चर्चा की वजह हाल ही में हुई गिरफ्तारी है। भारत की जांच एजेंसी National Investigation Agency ने 13 मार्च को एक कार्रवाई की। इस दौरान अमेरिकी भाड़े के सैनिक Matthew VanDyke को गिरफ्तार किया गया। उसके साथ छह यूक्रेनी नागरिक भी पकड़े गए। यह कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई थी। जांच एजेंसी ने अलग-अलग एयरपोर्ट से इन लोगों को हिरासत में लिया। जैसे ही यह खबर सामने आई, सुरक्षा विशेषज्ञों ने पुराने बयानों को याद करना शुरू किया। कुछ लोग मान रहे हैं कि इन घटनाओं के पीछे बड़ी कहानी हो सकती है।
पूर्वोत्तर में क्या हुआ था?
जांच एजेंसियों के मुताबिक विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। बाद में उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। आरोप है कि वे बिना अनुमति मिजोरम में दाखिल हुए। वहां से वे अशांत म्यांमार इलाके तक पहुंच गए। मिजोरम जैसे संवेदनशील इलाके में विदेशी नागरिकों के लिए विशेष परमिट जरूरी होता है। इसे प्रोटेक्टेड एरिया परमिट कहा जाता है। जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने नियमों को दरकिनार किया। एजेंसियों को शक है कि वे सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थे।
क्या उग्रवादी समूहों से कनेक्शन?
जांच एजेंसियां अब इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इन विदेशियों का संपर्क म्यांमार के कुछ एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स से हो सकता है। यह वही समूह हैं जो म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। जांच में यह भी कहा गया कि कुछ विदेशी लोगों ने हथियारों की ट्रेनिंग दी। साथ ही यूरोप से लाए गए ड्रोन भी उपलब्ध कराए गए। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला गंभीर हो सकता है। क्योंकि पूर्वोत्तर भारत पहले से ही सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है।
कौन हैं मैथ्यू वैनडाइक?
Matthew VanDyke का नाम अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों में जाना जाता है। वह पहले लीबिया और सीरिया जैसे इलाकों में सक्रिय रहा है। 2011 में लीबिया के युद्ध के दौरान वह युद्धबंदी भी बना था। वैनडाइक ने Sons of Liberty International नाम का एक संगठन बनाया था। यह संगठन कथित तौर पर सुरक्षा प्रशिक्षण देने का दावा करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार वह सिरते की लड़ाई में भी शामिल रहा था। यह लड़ाई विद्रोहियों और Muammar Gaddafi के समर्थक बलों के बीच हुई थी।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
सुरक्षा विशेषज्ञ इस पूरे मामले को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह केवल अवैध गतिविधि का मामला भी हो सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे बड़े क्षेत्रीय खेल से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अस्थिर क्षेत्रों में बाहरी ताकतें सक्रिय रहती हैं। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक जांच में यह साबित नहीं हुआ है कि शेख हसीना का पुराना दावा सही था। सरकार और एजेंसियां फिलहाल केवल तथ्यों के आधार पर जांच कर रही हैं।
बड़ी तस्वीर क्या बताती है?
पूरे मामले को समझने के लिए क्षेत्रीय हालात भी देखना जरूरी है। 2021 Myanmar military coup के बाद से म्यांमार में गृहयुद्ध जैसी स्थिति है। कई एथनिक समूह सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। भारत और म्यांमार की सीमा लंबी और कठिन है। यहां निगरानी करना आसान नहीं होता। ऐसे में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी चिंता बढ़ा देती है। अभी यह साफ नहीं है कि ये घटनाएं आपस में जुड़ी हैं या नहीं। फिलहाल सबकी नजर जांच एजेंसियों की अगली रिपोर्ट पर है।

























