बिजनेस न्यूज. 6 दिसंबर, 2024 को बिटकॉइन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन दर्ज किया जाएगा, जब इसने पहली बार $100,000 का मानसिक स्तर पार किया। यह मील का पत्थर डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी चुनावों में जीत के बाद शुरू हुए बुल रन का परिणाम है, जो अब तक 30% से भी अधिक बढ़ चुका है। इसे 2025 में बिटकॉइन के भविष्य के लिए एक नए उत्साह के रूप में देखा जा रहा है।
सोना और तेल से आगे बढ़ा बिटकॉइन
अमेरिकी चुनावों के बाद बिटकॉइन की कीमत में तेजी आई, जबकि पारंपरिक संपत्तियों जैसे सोना और तेल ने मुश्किलें झेली। उदाहरण के तौर पर, तेल की कीमतों में 6% की गिरावट आई, जबकि सोने की कीमत 1% कम हुई। इसके विपरीत, बिटकॉइन ने नई ऊंचाइयों को छुआ।
$200,000 तक पहुंचने का अनुमान
विशेषज्ञों के अनुसार, बिटकॉइन की यह गति अभी थमी नहीं है। कई विश्लेषकों का कहना है कि 2025 तक बिटकॉइन की कीमत $200,000 तक भी पहुंच सकती है। NUPL इंडिकेटर भी इस बात का समर्थन करता है, जो निवेशकों के बीच सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
ट्रम्प का समर्थन और सरकार का सहयोग
बिटकॉइन की बढ़ती गति को अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से भारी समर्थन मिल रहा है। ट्रंप ने अमेरिका को दुनिया की बिटकॉइन राजधानी बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा, ट्रंप की क्रिप्टो-समर्थक योजनाएं और कानून बिटकॉइन के भविष्य के लिए सकारात्मक दिशा दिखा रहे हैं।
भूटान और रूस की भूमिका
दुनियाभर में भूटान और रूस जैसे देश भी इस नई संपत्ति के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भाग ले रहे हैं। इससे बिटकॉइन की कीमत में और वृद्धि हो सकती है। भारत में भी नए आरबीआई गवर्नर और SEBI के सहयोग से भारतीय निवेशकों के बीच बिटकॉइन की लोकप्रियता बढ़ेगी।
सरकारी हिस्सेदारी में वृद्धि
बिटकॉइन की बढ़ती मूल्यवृद्धि के साथ कई सरकारों ने इसमें रुचि दिखानी शुरू कर दी है। ट्रंप प्रशासन भी बिटकॉइन रिजर्व स्थापित करने की योजना बना रहा है। चीन, यूक्रेन, जापान, भूटान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने बिटकॉइन खरीद और माइनिंग में साझेदारी करना शुरू किया है।
सकारात्मक नियमन की आवश्यकता
बिटकॉइन की सफलता का एक प्रमुख कारण इसका विकेंद्रीकरण है। 2023 में G20 सम्मेलन में भारत ने क्रिप्टो नियमन की बात की थी। आने वाले समय में वैश्विक नियमन बिटकॉइन की पहुंच को और बढ़ा सकता है।
निवेशकों की भूमिका
बिटकॉइन की कीमत को स्थिर रखने में निवेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देशों में निवेशकों की बढ़ती भूमिका इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।























