अमेरिका के न्याय मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक की गई एपस्टीन फाइलों ने ब्रिटिश राजनीति में अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है। इन दस्तावेजों में ऐसे नाम सामने आए हैं जिन्होंने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी। आरोप है कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ राजनयिक के एपस्टीन से पुराने और गहरे संबंध थे। इन खुलासों के बाद स्टार्मर सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। विपक्ष और मीडिया दोनों हमलावर हैं। मामला अब केवल नैतिकता का नहीं रहा। यह राष्ट्रीय भरोसे से जुड़ गया है।
पीटर मैंडेलसन पर उंगली क्यों उठी?
2024 में कीर स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था। जनवरी 2026 में सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि मैंडेलसन के जेफरी एपस्टीन से लंबे समय तक निजी संबंध रहे। आरोप है कि 2008 के वित्तीय संकट के दौरान उन्होंने एपस्टीन को गोपनीय सरकारी जानकारियां साझा कीं। बदले में आर्थिक लाभ लेने के भी संकेत मिले हैं। यह खुलासा लेबर पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। स्टार्मर पर फैसले की जिम्मेदारी आ गई।
स्टार्मर ने पहले क्यों हटाया था?
सितंबर 2025 में कीर स्टार्मर ने पीटर मैंडेलसन को राजदूत पद से हटा दिया था। उस समय इसे सामान्य प्रशासनिक फैसला बताया गया। अब नए दस्तावेज सामने आने के बाद यह कदम अधूरा माना जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि स्टार्मर को पहले ही सब कुछ पता था। सरकार की सफाई पर भरोसा कम हो रहा है। पार्टी के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। नेतृत्व पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
चीफ ऑफ स्टाफ के इस्तीफे का क्या मतलब?
8 फरवरी 2026 को स्टार्मर को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनके चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया। मैकस्वीनी वही व्यक्ति थे जिन्होंने मैंडेलसन की नियुक्ति की सिफारिश की थी। इस्तीफे के बाद उन्होंने माना कि यह फैसला पूरी तरह गलत था। उन्होंने कहा कि इससे जनता का भरोसा टूटा है। मैकस्वीनी स्टार्मर की चुनावी जीत के मुख्य रणनीतिकार थे। उनकी विदाई ने सरकार को कमजोर कर दिया।
पुलिस जांच कहां तक पहुंची?
ब्रिटिश पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। पीटर मैंडेलसन की कई निजी संपत्तियों पर छापेमारी की जा चुकी है। भ्रष्टाचार और गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोपों की कानूनी जांच चल रही है। बढ़ते दबाव के बीच मैंडेलसन ने लेबर पार्टी और हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस लीक का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ा। मामला अब केवल राजनीतिक नहीं रहा।
पीएम स्टार्मर ने माफी क्यों मांगी?
विवाद के केंद्र में आने के बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सार्वजनिक रूप से एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मैंडेलसन ने अपनी पिछली गतिविधियों के बारे में उन्हें गुमराह किया था। स्टार्मर ने पारदर्शिता के लिए सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने का वादा किया। हालांकि विपक्ष इसे डैमेज कंट्रोल बता रहा है। आलोचकों का कहना है कि माफी से भरोसा वापस नहीं आएगा। सवाल जवाब से बड़ा हो गया है।
क्या कीर स्टार्मर कुर्सी बचा पाएंगे?
मौजूदा हालात में यह साफ नहीं है कि कीर स्टार्मर अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या नहीं। वे दुनिया के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन सकते हैं जिन्हें एपस्टीन विवाद के कारण इस्तीफा देना पड़े। विपक्ष इसे उनकी व्यक्तिगत और नैतिक विफलता बता रहा है। लेबर पार्टी के भीतर भी नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठ रही है। कमजोर अर्थव्यवस्था और यह बड़ा घोटाला सरकार के भविष्य पर सवाल खड़ा कर रहा है। ब्रिटेन की राजनीति निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।























