क्राइम न्यूज. आंध्र प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि शव पार्सल मामले की गुत्थी को सुलझाते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। श्रीधर वर्मा, पेनमेत्सा सुषमा और चेकुरी रेवती को सागी तुलसी और उसके माता-पिता मुदुनुरी रंगा राजू (60) और मुदुनुरी हिमावती (56) को धमकाने के लिए ‘ऑपरेशन सिद्ध-चेपा’ की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।19 दिसंबर को पश्चिमी गोदावरी जिले के येंदागांडी गांव में एक अज्ञात व्यक्ति का शव एक लकड़ी के बक्से में भेजा गया। शव के साथ एक पत्र भी था, जिसमें परिवार से एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई थी।
शव मुदुनुरी रंगा राजू के घर भेजा गया था, जिससे यह मामला और भी रहस्यमय बन गया। बाद में पुलिस ने शव की पहचान गांधीनगर के निवासी बी. परलेया के रूप में की। वह एक बेघर व्यक्ति था और पारिवारिक विवादों से इसका कोई संबंध नहीं था।
हत्या की साजिश और अपराधी गिरफ्तार
पुलिस अधीक्षक अदनान नईम असमी ने खुलासा किया कि हत्या की साजिश छह से सात महीने पहले से रची गई थी। मुख्य अपराधी वर्मा, सुषमा और रेवती को गिरफ्तार किया गया है। वर्मा और सुषमा लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे, जबकि रेवती वर्मा की पत्नी थी। जांच के अनुसार, यह तीनों आरोपी परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए इस हत्या की योजना में शामिल थे।
संपत्ति विवाद और हत्या की वजह
तुलसी और उसकी मां के बीच के मतभेदों के कारण तुलसी ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ अलग रहने का निर्णय लिया था। इस बीच, वर्मा और सुषमा ने हत्या की योजना बनाई ताकि वे तुलसी और उसकी मां को डराकर संपत्ति हासिल कर सकें। पुलिस के अनुसार, 17 दिसंबर को वर्मा और सुषमा ने परलेया को अपने खेत पर काम करने के लिए बुलाया और फिर उसे शराब पिलाकर कार में वेंद्रम गांव ले गए। वहां परलेया की गला घोंटकर हत्या कर दी गई और शव को लकड़ी के बक्से में रखकर राजू के घर भेज दिया गया।
फिरौती की मांग
सुषमा ने शव के साथ एक पत्र भेजा, जिसमें 1.3 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। जब बक्सा राजू के घर पहुंचा, तो उसमें बिजली का सामान नहीं बल्कि एक लाश थी और साथ में पैसे मांगने वाला पत्र भी था। इस सनसनीखेज घटना ने परिवार को हैरान कर दिया और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जांच में त्वरित कार्रवाई की और वर्मा, सुषमा और रेवती को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएनएस धारा 103 और 61(2) सहपठित 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने 11 टीमों का गठन किया और एक सप्ताह से अधिक समय तक जांच की।

























