‘धुरंधर 2’ रिलीज के साथ ही चर्चा में आ गई।फिल्म को लेकर बहस भी शुरू हो गई।कुछ लोग इसे साहसी कहानी बता रहे हैं।तो कुछ इसे विवादों से जोड़ रहे हैं।राजनीतिक संदर्भों ने माहौल गरमा दिया।सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई।फिल्म लगातार सुर्खियों में बनी रही।
क्या राजनीति ने कहानी को बदला?
फिल्म में राजनीति का असर साफ दिखता है।पहले भाग के मुकाबले यह ज्यादा खुलकर सामने आया है।कहानी में सत्ता बदलने के साथ घटनाएं बदलती हैं।एक जासूस को ज्यादा आजादी मिलती है।सरकारी फैसलों को भी कहानी में जोड़ा गया है।इससे फिल्म को नया एंगल मिला है।कहानी और दिलचस्प बनी है।
किरदारों पर क्यों मचा बवाल?
फिल्म का एक किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में है।कहा जा रहा है कि यह एक असली नेता से प्रेरित है।हालांकि नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।लेकिन दर्शकों को इशारा समझ आ गया।कहानी में उस किरदार की मौत ने बहस बढ़ा दी।यही वजह है कि विवाद और गहराया।
क्या कहानी में दिखा बड़ा नेटवर्क?
फिल्म में आतंकवाद और ड्रग्स का जिक्र है।अवैध हथियारों का जाल भी दिखाया गया है।यह नेटवर्क देश के बाहर तक जुड़ा दिखाया गया।कहानी में एक गैंगस्टर का कनेक्शन भी सामने आता है।सरकार की भूमिका भी दिखाई गई है।यही हिस्सा फिल्म को अलग बनाता है।
क्या सिर्फ विवाद से मिलती है सफलता?
कई लोग मानते हैं कि विवाद फिल्म को हिट बनाते हैं।लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है।पहले भी ऐसी फिल्में आई हैं।जिनमें राजनीति दिखाई गई थी।लेकिन वे ज्यादा नहीं चलीं।इससे साफ है कि विवाद अकेले काफी नहीं होते।फिल्म को मजबूत कंटेंट भी चाहिए होता है।
दर्शकों की उत्सुकता कितनी अहम रही?
‘धुरंधर 2’ की असली ताकत दर्शकों की उत्सुकता रही।पहले भाग ने ही लोगों को जोड़ लिया था।लोग जानना चाहते थे आगे क्या होगा।यही जिज्ञासा उन्हें सिनेमाघरों तक लाई।फिल्म ने उस उम्मीद को पूरा किया।कहानी ने लोगों को बांधे रखा।
क्या कहानी ही बनी असली हीरो?
फिल्म में राजनीति जरूर है लेकिन पूरी कहानी उसी पर नहीं टिकी।मुख्य फोकस किरदार की यात्रा पर है।दूसरे भाग में घटनाएं और गहरी होती हैं।लेकिन कहानी का केंद्र वही रहता है।यही संतुलन फिल्म को खास बनाता है।और यही इसकी सफलता का असली कारण है।

























