ऑस्कर 2026 की सूची सामने आते ही भारत को झटका लगा। आधिकारिक एंट्री रही होमबाउंड फाइनल नॉमिनेशन में जगह नहीं बना पाई। लंबे समय से जिस पल का इंतजार था वह फिर खाली निकला। सिनेमा प्रेमियों की उम्मीद टूट गई। माना जा रहा था इस बार कहानी बदलेगी। चर्चाओं का माहौल मजबूत था। लेकिन नतीजा पहले जैसा ही रहा।
फिल्म से इतनी उम्मीद क्यों थी?
होमबाउंड को शुरुआत से खास माना जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में फिल्म को सराहना मिली थी। कहानी आम लोगों के दर्द से जुड़ी थी। निर्देशन में संवेदनशीलता दिखी। अभिनय को ईमानदार बताया गया। यही वजह थी कि उम्मीदें बढ़ीं। लोगों को लगा ऑस्कर अब दूर नहीं।
कहानी दुनिया को क्या बताती है?
फिल्म दो दोस्तों की यात्रा दिखाती है। दोनों समाज के हाशिए से आते हैं। लॉकडाउन में उनकी नौकरियां चली जाती हैं। मजबूरी उन्हें घर लौटने पर मजबूर करती है। रास्ते में संघर्ष और भेदभाव सामने आता है। हालात कड़वी सच्चाई दिखाते हैं। फिल्म समाज का आईना बनती है।
अभिनय ने कितना असर डाला?
फिल्म में Ishaan Khatter और Vishal Jethwa मुख्य भूमिकाओं में हैं। दोनों का अभिनय सहज लगा। भावनाएं बनावटी नहीं दिखीं। किरदारों का दर्द महसूस हुआ। सहायक कलाकारों ने भी मजबूती दी। अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बना। यही वजह रही कि विदेशों में भी चर्चा हुई।
निर्देशक की सोच कितनी अलग रही?
फिल्म का निर्देशन Neeraj Ghaywan ने किया। वे संवेदनशील सिनेमा के लिए पहचाने जाते हैं। इस फिल्म में भी शोर नहीं है। कहानी धीरे आगे बढ़ती है। कैमरा किरदारों के साथ चलता है। संवाद कम लेकिन असर गहरा है। यही शैली फिल्म को अलग बनाती है।
भारत का ऑस्कर सूखा क्यों?
भारत को आखिरी बार 2002 में नॉमिनेशन मिला था। तब Lagaan ने इतिहास रचा था। उसके बाद दो दशक से ज्यादा बीत चुके हैं। हर साल उम्मीद जगती है। हर बार निराशा हाथ लगती है। सवाल वही बना हुआ है। क्या वैश्विक मंच भारतीय कहानियां समझ पा रहा है।
आगे रास्ता क्या निकल सकता है?
होमबाउंड का बाहर होना अंत नहीं है। फिल्म ने अपनी जगह बनाई है। इसने बातचीत जरूर शुरू की। भारतीय सिनेमा की संवेदनशील कहानियां दुनिया तक पहुंचीं। अब जरूरत धैर्य की है। बेहतर रणनीति की है। और लगातार कोशिश की है। शायद अगली बार कहानी बदले।

























